हमारी कोशिश है एक ऐसी दुनिया में रचने बसने की जहाँ सत्य सबका साझा हो; और सभी इसकी अभिव्यक्ति में मित्रवत होकर सकारात्मक संसार की रचना करें।

रविवार, 10 अगस्त 2025

प्रकृति-कुंज में राखी

रक्षाबंधन के सुअवसर पर जो छुट्टी मिली उसमें हम एक बार फिर से सहारनपुर के प्रकृति कुंज पहुँच गए। इस बार मेरी धर्मपत्नी भी साथ थीं। इस अनोखी वाटिका के बारे में पहले भी बता चुका हूँ। लेकिन आज  चमत्कारी ‘राखी पुष्प' के बारे में अद्भुत जानकारी मिली।

आकाश जी ने इस विशेष फूल के बारे में गज़ब की बात बताई। देखें वीडियो। द्रौपदी चीर हरण का पूरा दृश्य इस फूल के भीतर समाया हुआ है। सौ कौरव, पाँच पांडव, द्रौपदी, त्रिदेव, और धृतराष्ट्र, भीष्म, द्रोणाचार्य, कृपाचार्य, कर्ण, विदुर, शकुनी और अन्य दरबारियों की उपस्थिति इस फूल के विभिन्न भागों (वाह्यदल, पंखुड़ी, पुंकेसर, स्त्रीकेसर) के रूप में विद्यमान हैं। वीडियो में जब बताया गया कि इसमें बैंगनी रंग की ठीक सौ पंखुड़ियां कौरवों की प्रतीक हैं तो हमने इस फूल का विच्छेदन करके इनकी संख्या सत्यापित करने का निर्णय लिया।

घर आकर सावधानी से इन पंखुड़ियों को अलग करके गिनती की गई तो ठीक सौ की संख्या ही मिली। तब मैंने हरे रंग के दस वाह्यदलों को धृतराष्ट्र व अन्य दरबारियों के रूप में मान लेना उचित समझा। है ना एक प्राकृतिक चमत्कार!

महाभारत का युद्ध जिस घटना के कारण लड़ा गया उसमें द्रौपदी व कृष्ण के बीच भाई - बहन के रिश्ते की याद दिलाते इस पुष्प को राखी पुष्प के नाम से ठीक ही जाना जाता है।











बुधवार, 25 जून 2025

रिमझिम फुहारों में साइकिल से सैर और डाल के पके आम

 आज सुबह आँख खुली तो खिड़की के बाहर से टपर-टपर की मधुर ध्वनि आ रही थी। मतलब यह कि सहारनपुर में झमाझम बारिश हो रही है। मोबाइल में मिस्ड कॉल पड़ी थी- हमारे जिम ट्रेनर की। जिसका मतलब था आज छुट्टी रहेगी। मैने दैनिक योगासन व प्राणायाम करते हुए यह मन बना लिया कि आज आउटडोर साइकिल चलाकर कार्डियो का अभ्यास पूरा कर लूँ। असली लालच तो हरे - भरे वातावरण में स्वच्छ फुहारों से भींगने का आनंद लेने का था।

तो हम घनघोर बारिश में निकल लिए साइकिल चलाने। पक्की सड़क को काटने वाली नहर मिली तो उसकी कच्ची पटरी पर एक साहसिक यात्रा के लिए आगे बढ़ गये। कच्ची पटरी की सड़क में छोटे-छोटे गढ्ढों में पानी भरा हुआ था। उनसे बचते-बचाते बढ़ते रहे तो बड़ी नहर की पटरी मिली जिसपर टूटा-फूटा खड़ंजा लगा था। पानी वाले छोटे गढ्ढे यहाँ भी थे लेकिन इसपर फिसलने का खतरा कम था। थोड़ी दूर और चलने पर एक ग्रामीण पिच रोड मिल गयी। उस पक्की सड़क को पकड़कर आगे बढ़े तो हमारी मुख्य सड़क मिल गई जो विश्वविद्यालय तक ले आई।

इस बारिश ने किसानों का काम आगे बढ़ा दिया है। धान की रोपाई प्रगति पर है। रास्ते में कई किसान फावड़े से खेतों की मेड़ ठीक करते दिखाई दिए जिससे बारिश का पानी बहकर दूसरी ओर न चला जाय। गन्ने की फसल भी लहलहा रही थी। इसे अब अलग से सींचना नहीं पड़ेगा।

बारिश में भींगकर खराब न हो जाय इस डर से मैने पॉलीथिन में लिपटे मोबाइल को बाहर नहीं निकाला। इसलिए इस बार तस्वीरें नहीं ले पाया।

वापस लौटते समय आम के बाग में गया जहाँ रखवाला चादर ताने सो रहा था। मैने आवाज दी - अब उठ जाइए सुबह हो गई है। वो हड़बड़ाकर उठा। फिर मुझे साइकिल पर तरबतर भींगा देखकर मुस्कराने लगा।

मैने पूछा - अभी आम पके कि नहीं?

उसने कहा - पक रहे हैं।

इसके बाद उसने छोटे बच्चे से कहा कि कैरेट में से छांटकर कुछ आम लाए। एक पॉलीथीन में आम रखकर देने लगा जो ऊपर से बिल्कुल कच्चे लग रहे थे। दबाने पर भी कड़े थे।

मेरी प्रश्नवाचक दृष्टि का समाधान करते हुए बोला - ले जाओ, छीलकर अभी खाओ। बहुत मीठे लगेंगे।

घर आकर मैने वही किया और वैसा ही पाया। यह एकमात्र तस्वीर उन्हीं आमों की है। डाल के पके स्वादिष्ट ताजे आम।

उस भले आदमी ने इसका पैसा भी नहीं लिया। बोला - जब सड़क पर दुकान लगाकर बेचूंगा तब पैसे लूंगा। यहां तो जितना खाना चाहे सब फ्री रहेगा।




बुधवार, 18 जून 2025

प्रकृति-कुंज का अप्रतिम पादप परिवार

सहारनपुर में दिल्ली रोड पर शहर की बाहरी सीमा से लगा हुआ 'प्रकृति-कुंज' एक अनूठा स्थान है। चुनहटी रेलवे क्रॉसिंग के तुरंत बाद हाइवे किनारे जमीन के एक बड़े टुकड़े पर विकसित इस हरे-भरे प्रांगण में अनेक दुर्लभ औषधीय व फलदार वृक्ष खड़े हैं। प्रांगण में ढेरों प्रजाति के फूल हैं जिनकी डालियां और लताएं लहलहा रही हैं।

भारतीय ज्योतिष में नौ ग्रह और सत्ताईस नक्षत्र अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाते हैं। ऐसी मान्यता है कि इनकी विशिष्ट स्थिति का सीधा प्रभाव मनुष्य के जीवन पर पड़ता है। इन ग्रहों व नक्षत्रों का संबंध विशिष्ट प्रजाति के पेड़ पौधों से भी है जिनके रोपण व पुष्पन-पल्लवन से संबंधित ग्रह व नक्षत्र अनुकूल हो जाते हैं। यहां एक स्थान पर वे सभी पेड़-पौधे परिचय सहित प्रदर्शित हैं।

आज प्रकृति कुंज की संक्षिप्त सैर करने का अवसर मिला तो वहाँ के स्वयंसेवक आकाश जी ने ऐसे ही अनेक दुर्लभ और चमत्कारिक गुणों से युक्त पेड़-पौधे व लताएं दिखायी।

आज जो देखने को मिला उसमें 9 ग्रहों व 27 नक्षत्रों की प्रतिनिधि वनस्पति के अलावा स्पर्श करते ही सिकुड़ जाने वाली छुई-मुई, राखी व घंटी के आकार वाली पुष्प लताएं, सांप को 50 मीटर की लक्ष्मण रेखा से बाहर रखने वाला पेड़, लैला-मजनू नामक पौधा जिसकी पत्तियां ऊपर से बिल्कुल हरी और नीचे दूसरी तरफ से लाल रंग की थी। इसके अलावा खट्टे-मीठे स्वाद वाला फ़ालसा, बड़ी इलायची, रीठा, मोरिंगा और लाल व हरे सेब के पेड़, पाँच-छः प्रकार की तुलसी के पौधे और शराब को पानी बना देने वाला व दूध की दही जमा देने वाला चमत्कारी पौधा भी देखने को मिला। मीठी स्टीविया भी थी और प्राकृतिक इंसुलिन का पौधा भी था। वह झाड़ी नुमा पौधा भी दिखा जिससे फूलझाड़ू बनता है।

बरगद जैसे दिखने वाले एक पेड़ की पत्तियां दोने के आकार की थीं। बताते हैं कि बाल्यावस्था में कृष्ण भगवान इन्हीं पत्तियों में रखकर माखन मिश्री का भोग करते थे। देखने को तो सैकड़ों अन्य वनस्पतियां भी थीं लेकिन उनका नाम याद रखना बहुत टेढ़ी खीर है।

आप तो बस इनके चित्र देखिए और खुद ही बूझने का प्रयास कीजिए। दो अदद वीडियो अलग से लगाने का प्रयास करूंगा जिसमें आकाश जी ने कुछ पेड़ पौधों का परिचय देने का प्रयास किया है। बहुत कुछ देखने से रह गया क्यों कि समय की बेहद कमी थी। किसी छुट्टी के दिन विस्तार से भ्रमण का मन है।