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बुधवार, 25 जून 2025

रिमझिम फुहारों में साइकिल से सैर और डाल के पके आम

 आज सुबह आँख खुली तो खिड़की के बाहर से टपर-टपर की मधुर ध्वनि आ रही थी। मतलब यह कि सहारनपुर में झमाझम बारिश हो रही है। मोबाइल में मिस्ड कॉल पड़ी थी- हमारे जिम ट्रेनर की। जिसका मतलब था आज छुट्टी रहेगी। मैने दैनिक योगासन व प्राणायाम करते हुए यह मन बना लिया कि आज आउटडोर साइकिल चलाकर कार्डियो का अभ्यास पूरा कर लूँ। असली लालच तो हरे - भरे वातावरण में स्वच्छ फुहारों से भींगने का आनंद लेने का था।

तो हम घनघोर बारिश में निकल लिए साइकिल चलाने। पक्की सड़क को काटने वाली नहर मिली तो उसकी कच्ची पटरी पर एक साहसिक यात्रा के लिए आगे बढ़ गये। कच्ची पटरी की सड़क में छोटे-छोटे गढ्ढों में पानी भरा हुआ था। उनसे बचते-बचाते बढ़ते रहे तो बड़ी नहर की पटरी मिली जिसपर टूटा-फूटा खड़ंजा लगा था। पानी वाले छोटे गढ्ढे यहाँ भी थे लेकिन इसपर फिसलने का खतरा कम था। थोड़ी दूर और चलने पर एक ग्रामीण पिच रोड मिल गयी। उस पक्की सड़क को पकड़कर आगे बढ़े तो हमारी मुख्य सड़क मिल गई जो विश्वविद्यालय तक ले आई।

इस बारिश ने किसानों का काम आगे बढ़ा दिया है। धान की रोपाई प्रगति पर है। रास्ते में कई किसान फावड़े से खेतों की मेड़ ठीक करते दिखाई दिए जिससे बारिश का पानी बहकर दूसरी ओर न चला जाय। गन्ने की फसल भी लहलहा रही थी। इसे अब अलग से सींचना नहीं पड़ेगा।

बारिश में भींगकर खराब न हो जाय इस डर से मैने पॉलीथिन में लिपटे मोबाइल को बाहर नहीं निकाला। इसलिए इस बार तस्वीरें नहीं ले पाया।

वापस लौटते समय आम के बाग में गया जहाँ रखवाला चादर ताने सो रहा था। मैने आवाज दी - अब उठ जाइए सुबह हो गई है। वो हड़बड़ाकर उठा। फिर मुझे साइकिल पर तरबतर भींगा देखकर मुस्कराने लगा।

मैने पूछा - अभी आम पके कि नहीं?

उसने कहा - पक रहे हैं।

इसके बाद उसने छोटे बच्चे से कहा कि कैरेट में से छांटकर कुछ आम लाए। एक पॉलीथीन में आम रखकर देने लगा जो ऊपर से बिल्कुल कच्चे लग रहे थे। दबाने पर भी कड़े थे।

मेरी प्रश्नवाचक दृष्टि का समाधान करते हुए बोला - ले जाओ, छीलकर अभी खाओ। बहुत मीठे लगेंगे।

घर आकर मैने वही किया और वैसा ही पाया। यह एकमात्र तस्वीर उन्हीं आमों की है। डाल के पके स्वादिष्ट ताजे आम।

उस भले आदमी ने इसका पैसा भी नहीं लिया। बोला - जब सड़क पर दुकान लगाकर बेचूंगा तब पैसे लूंगा। यहां तो जितना खाना चाहे सब फ्री रहेगा।




बुधवार, 18 जून 2025

प्रकृति-कुंज का अप्रतिम पादप परिवार

सहारनपुर में दिल्ली रोड पर शहर की बाहरी सीमा से लगा हुआ 'प्रकृति-कुंज' एक अनूठा स्थान है। चुनहटी रेलवे क्रॉसिंग के तुरंत बाद हाइवे किनारे जमीन के एक बड़े टुकड़े पर विकसित इस हरे-भरे प्रांगण में अनेक दुर्लभ औषधीय व फलदार वृक्ष खड़े हैं। प्रांगण में ढेरों प्रजाति के फूल हैं जिनकी डालियां और लताएं लहलहा रही हैं।

भारतीय ज्योतिष में नौ ग्रह और सत्ताईस नक्षत्र अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाते हैं। ऐसी मान्यता है कि इनकी विशिष्ट स्थिति का सीधा प्रभाव मनुष्य के जीवन पर पड़ता है। इन ग्रहों व नक्षत्रों का संबंध विशिष्ट प्रजाति के पेड़ पौधों से भी है जिनके रोपण व पुष्पन-पल्लवन से संबंधित ग्रह व नक्षत्र अनुकूल हो जाते हैं। यहां एक स्थान पर वे सभी पेड़-पौधे परिचय सहित प्रदर्शित हैं।

आज प्रकृति कुंज की संक्षिप्त सैर करने का अवसर मिला तो वहाँ के स्वयंसेवक आकाश जी ने ऐसे ही अनेक दुर्लभ और चमत्कारिक गुणों से युक्त पेड़-पौधे व लताएं दिखायी।

आज जो देखने को मिला उसमें 9 ग्रहों व 27 नक्षत्रों की प्रतिनिधि वनस्पति के अलावा स्पर्श करते ही सिकुड़ जाने वाली छुई-मुई, राखी व घंटी के आकार वाली पुष्प लताएं, सांप को 50 मीटर की लक्ष्मण रेखा से बाहर रखने वाला पेड़, लैला-मजनू नामक पौधा जिसकी पत्तियां ऊपर से बिल्कुल हरी और नीचे दूसरी तरफ से लाल रंग की थी। इसके अलावा खट्टे-मीठे स्वाद वाला फ़ालसा, बड़ी इलायची, रीठा, मोरिंगा और लाल व हरे सेब के पेड़, पाँच-छः प्रकार की तुलसी के पौधे और शराब को पानी बना देने वाला व दूध की दही जमा देने वाला चमत्कारी पौधा भी देखने को मिला। मीठी स्टीविया भी थी और प्राकृतिक इंसुलिन का पौधा भी था। वह झाड़ी नुमा पौधा भी दिखा जिससे फूलझाड़ू बनता है।

बरगद जैसे दिखने वाले एक पेड़ की पत्तियां दोने के आकार की थीं। बताते हैं कि बाल्यावस्था में कृष्ण भगवान इन्हीं पत्तियों में रखकर माखन मिश्री का भोग करते थे। देखने को तो सैकड़ों अन्य वनस्पतियां भी थीं लेकिन उनका नाम याद रखना बहुत टेढ़ी खीर है।

आप तो बस इनके चित्र देखिए और खुद ही बूझने का प्रयास कीजिए। दो अदद वीडियो अलग से लगाने का प्रयास करूंगा जिसमें आकाश जी ने कुछ पेड़ पौधों का परिचय देने का प्रयास किया है। बहुत कुछ देखने से रह गया क्यों कि समय की बेहद कमी थी। किसी छुट्टी के दिन विस्तार से भ्रमण का मन है।





















सोमवार, 16 जून 2025

योग-महोत्सव का एक दिन लोहिया पार्क लखनऊ में

आगामी 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की तैयारी जोर शोर से चल रही है। राज्य के सभी विश्वविद्यालय पूरे एक माह का योग महोत्सव मना रहे हैं। सभी संबद्ध महाविद्यालय बारी बारी से बड़े-बड़े सामूहिक कार्यक्रम आयोजित कर रहे हैं। मैं तो साल के 365 दिन योगाभ्यास करता हूँ। आज एक बैठक में भाग लेने लखनऊ आया तो सबेरे का योगाभ्यास गोमती नगर के लोहिया पार्क में करके आनंद आ गया।











शुक्रवार, 13 जून 2025

योग महोत्सव में अद्भुत प्रदर्शन

#राजभवन_उत्तरप्रदेश के निर्देशों के अनुपालन में माँ शाकुंभरी विश्वविद्यालय के तत्वावधान में आयोजित एक माह तक चलने वाले #योग_महोत्सव के अंतर्गत जे.वी.जैन डिग्री कॉलेज, सहारनपुर के मैदान में आज प्रातः सूर्योदय काल में आयोजित योगाभ्यास कार्यक्रम में सम्मिलित होने का अवसर मिला। लगभग 800 बच्चों ने एक साथ योगाभ्यास किया। यहां शारीरिक शिक्षा विभाग के बच्चों ने अनेक दुष्कर आसन और संरचनाओं का अद्भुत प्रदर्शन भी किया। कुछ झलकियां आप भी देखिए।




















गुरुवार, 12 जून 2025

भीषण गर्मी में प्याऊ सेवा

सहारनपुर की भीषण गर्मी में राहगीरों को राहत देने के लिए मेरे दूसरे (अतिरिक्त) कार्यालय के स्टाफ ने आज बर्फ मिला हुआ मीठा शरबत पिलाने का इंतजाम किया। इस पुण्य कार्य में सहभागी बनने का सौभाग्य मुझे भी मिला।