रक्षाबंधन के सुअवसर पर जो छुट्टी मिली उसमें हम एक बार फिर से सहारनपुर के प्रकृति कुंज पहुँच गए। इस बार मेरी धर्मपत्नी भी साथ थीं। इस अनोखी वाटिका के बारे में पहले भी बता चुका हूँ। लेकिन आज चमत्कारी ‘राखी पुष्प' के बारे में अद्भुत जानकारी मिली।
आकाश जी ने इस विशेष फूल के बारे
में गज़ब की बात बताई। देखें वीडियो। द्रौपदी चीर हरण का पूरा दृश्य इस फूल के
भीतर समाया हुआ है। सौ कौरव, पाँच पांडव, द्रौपदी,
त्रिदेव, और धृतराष्ट्र, भीष्म, द्रोणाचार्य, कृपाचार्य,
कर्ण, विदुर, शकुनी और
अन्य दरबारियों की उपस्थिति इस फूल के विभिन्न भागों (वाह्यदल, पंखुड़ी, पुंकेसर, स्त्रीकेसर)
के रूप में विद्यमान हैं। वीडियो में जब बताया गया कि इसमें बैंगनी रंग की ठीक सौ
पंखुड़ियां कौरवों की प्रतीक हैं तो हमने इस फूल का विच्छेदन करके इनकी संख्या
सत्यापित करने का निर्णय लिया।
घर आकर सावधानी से इन पंखुड़ियों
को अलग करके गिनती की गई तो ठीक सौ की संख्या ही मिली। तब मैंने हरे रंग के दस
वाह्यदलों को धृतराष्ट्र व अन्य दरबारियों के रूप में मान लेना उचित समझा। है ना
एक प्राकृतिक चमत्कार!
महाभारत का युद्ध जिस घटना के कारण
लड़ा गया उसमें द्रौपदी व कृष्ण के बीच भाई - बहन के रिश्ते की याद दिलाते इस
पुष्प को राखी पुष्प के नाम से ठीक ही जाना जाता है।










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