सहारनपुर में दिल्ली रोड पर शहर की बाहरी सीमा से लगा हुआ 'प्रकृति-कुंज' एक अनूठा स्थान है। चुनहटी रेलवे क्रॉसिंग के तुरंत बाद हाइवे किनारे जमीन के एक बड़े टुकड़े पर विकसित इस हरे-भरे प्रांगण में अनेक दुर्लभ औषधीय व फलदार वृक्ष खड़े हैं। प्रांगण में ढेरों प्रजाति के फूल हैं जिनकी डालियां और लताएं लहलहा रही हैं।
भारतीय ज्योतिष में नौ ग्रह और
सत्ताईस नक्षत्र अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाते हैं। ऐसी मान्यता है कि इनकी विशिष्ट
स्थिति का सीधा प्रभाव मनुष्य के जीवन पर पड़ता है। इन ग्रहों व नक्षत्रों का
संबंध विशिष्ट प्रजाति के पेड़ पौधों से भी है जिनके रोपण व पुष्पन-पल्लवन से
संबंधित ग्रह व नक्षत्र अनुकूल हो जाते हैं। यहां एक स्थान पर वे सभी पेड़-पौधे
परिचय सहित प्रदर्शित हैं।
आज प्रकृति कुंज की संक्षिप्त सैर
करने का अवसर मिला तो वहाँ के स्वयंसेवक आकाश जी ने ऐसे ही अनेक दुर्लभ और
चमत्कारिक गुणों से युक्त पेड़-पौधे व लताएं दिखायी।
आज जो देखने को मिला उसमें 9
ग्रहों व 27 नक्षत्रों की प्रतिनिधि वनस्पति के अलावा स्पर्श करते ही सिकुड़ जाने
वाली छुई-मुई, राखी व घंटी के आकार वाली पुष्प लताएं, सांप को 50 मीटर की लक्ष्मण रेखा से बाहर रखने वाला पेड़, लैला-मजनू नामक पौधा जिसकी पत्तियां ऊपर से बिल्कुल हरी और नीचे दूसरी तरफ
से लाल रंग की थी। इसके अलावा खट्टे-मीठे स्वाद वाला फ़ालसा, बड़ी
इलायची, रीठा, मोरिंगा और लाल व हरे
सेब के पेड़, पाँच-छः प्रकार की तुलसी के पौधे और शराब को
पानी बना देने वाला व दूध की दही जमा देने वाला चमत्कारी पौधा भी देखने को मिला।
मीठी स्टीविया भी थी और प्राकृतिक इंसुलिन का पौधा भी था। वह झाड़ी नुमा पौधा भी
दिखा जिससे फूलझाड़ू बनता है।
बरगद जैसे दिखने वाले एक पेड़ की
पत्तियां दोने के आकार की थीं। बताते हैं कि बाल्यावस्था में कृष्ण भगवान इन्हीं
पत्तियों में रखकर माखन मिश्री का भोग करते थे। देखने को तो सैकड़ों अन्य
वनस्पतियां भी थीं लेकिन उनका नाम याद रखना बहुत टेढ़ी खीर है।
आप तो बस इनके चित्र देखिए और खुद
ही बूझने का प्रयास कीजिए। दो अदद वीडियो अलग से लगाने का प्रयास करूंगा जिसमें
आकाश जी ने कुछ पेड़ पौधों का परिचय देने का प्रयास किया है। बहुत कुछ देखने से रह
गया क्यों कि समय की बेहद कमी थी। किसी छुट्टी के दिन विस्तार से भ्रमण का मन है।





















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