हमारी कोशिश है एक ऐसी दुनिया में रचने बसने की जहाँ सत्य सबका साझा हो; और सभी इसकी अभिव्यक्ति में मित्रवत होकर सकारात्मक संसार की रचना करें।
बुद्धिनाथ मिश्र लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
बुद्धिनाथ मिश्र लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

शनिवार, 23 नवंबर 2024

बुद्धिनाथ मिश्र जी का कालजयी गीत उनके ही स्वर में, मेरे घर में

एक सुखद संयोग बना जब मेरे भाग्य से आदरणीय बुद्धिनाथ मिश्रा जी ट्रैफिक जाम में अटक गए और उनकी सहारनपुर से लखनऊ की ट्रेन छूट गई। अगली ट्रेन कुछ घंटे बाद थी। मित्र मनीष कच्छल जी ने बताया तो मैंने शाम की चाय पर उन्हें  सानुरोध आमंत्रित किया। साथ में कुछ और कविगण भी पधारे। एक अल्पकालिक कविगोष्ठी हो गयी। शाम यादगार बन गई। कविश्रेष्ठ का कालजयी गीत बगल में बैठकर सुनने का आनंद ही कुछ और था। "एक बार जाल और फेंक रे मछेरे..."