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रविवार, 7 जून 2026

प्रयाग में नई पारी

आज एक नई पारी प्रारंभ करने का दिन था। सहारनपुर से वापस होकर एक बार फिरसे प्रिय प्रयागराज में सेवा का अवसर मिला है। इस बार नैनी क्षेत्र में स्थापित प्रोफेसर राजेंद्र सिंह (रज्जू भय्या) विश्वविद्यालय में वित्त अधिकारी के पद की जिम्मेदारी है। साथ ही डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी के वित्त नियंत्रक का अतिरिक्त प्रभार भी देखना है।

ज्वाइन करने से पहले संगम क्षेत्र के बड़े हनुमान जी का दर्शन करने का सौभाग्य मिला। शनिवार के दिन दर्शनार्थी भक्तों की अपार भीड़ थी। विश्वविद्यालय के असिस्टेंट प्रोफेसर व हमारे सर गंगानाथ झा छात्रावास के जूनियर डॉ सुशील कुमार सिंह के सहयोग से दर्शन-पूजन निर्विघ्न सम्पन्न हुआ।

अपनी पूर्वाधिकारी से चार्ज लेकर कुलपति जी के समक्ष हम उपस्थित हुए और विश्वविद्यालय की अगणित उपलब्धियों पर चर्चा हुई। आगे के कार्यक्रमों की तैयारी पर भी विचार विमर्श हुआ। शिक्षक संघ के पदाधिकारी भी मिलने आये।








सोमवार, 6 अप्रैल 2026

प्रयागराज अत्यंत प्रिय है मुझे

पिछले दिनों एक व्यक्तिगत प्रयोजन से मुझे प्रयागराज जाना हुआ। इस शहर की तासीर मुझे एक जादुई मोहपाश में बांध लेती है। मुझे लगता है कि मैंने अपने जीवन में जो कुछ भी अर्जित किया है वह इस तीर्थराज प्रयाग की ही देन है। इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक व परास्नातक की शिक्षा के बाद अल्पकालिक पत्रकारिता और फिर प्रतियोगी परीक्षा के माध्यम से राजकीय सेवा में चयन का गौरव इसी पावन भूमि पर मिला। कोषाधिकारी के रूप में यहाँ तैनाती हुई तो एक बार फिर लिखने-पढ़ने का सिलसिला नए सिरे से परवान चढ़ने लगा। ब्लॉगरी का नशा ऐसा चढ़ा कि देखते-देखते महाजाल के बड़े लिख्खाड़ों से परिचय हो गया। कई राष्ट्रीय स्तर के सेमिनार आयोजित करने का सौभाग्य मिला और हिंदुस्तानी एकेडमी के सौजन्य से मेरे ब्लॉग के भीतर से एक किताब भी छपकर आ गई। यह सब चमत्कार इसी प्रयागराज ने किया।

अस्तु आज भी जब मुझे प्रयागराज जाना होता है तो मैं यहाँ बहने वाली सरस्वती की धारा से एक तुष्टिकारक आचमन करने का लोभ संवरण नहीं कर पाता। इस बार भी मैं अत्यंत संक्षिप्त अवधि के बावजूद दो विभूतियों से मिला।

यूट्यूब पर सनातन संस्कृति और राष्ट्रवादी विचारधारा के प्रबल पैरोकार के रूप में प्रतिष्ठित अनुपम मिश्रा जी अपनी निष्पक्ष और निडर टिप्पणियों के लिए जाने जाते है। 'घूमता आइना' (@GhoomtaAaina_AnupamMishra) नाम से इनका बेहद लोकप्रिय यूट्यूब चैनल अपने दर्शकों से कोई सहयोग राशि नहीं मांगता। इसी चैनल पर रोज शाम को साढ़े आठ से नौ बजे के आसपास आप एक लाइव शो लेकर आते हैं जिसका नाम है - लोकतंत्र का नृत्य। राष्ट्रीय राजनीति से लेकर अंतरराष्ट्रीय घटनाओं तक और फिल्मों से लेकर खेल और मनोरंजन तक के विषयों की जैसी ज्ञानवर्धक और सरल समीक्षा आप करते हैं वह मंत्रमुग्ध कर देती है। अच्छे को अच्छा और बुरे को बुरा कहने का साहस आप में कूट-कूट कर भरा है। पॉलिटिकल करेक्टनेस का पाखंड आप नहीं पालते। वोकिज्म और सेकुलरिज्म का कीड़ा आपको बहुत खतरनाक लगता है जिससे बचने की सलाह आप देते रहते हैं। @scribe9104 ट्विटर (अब X ) पर आप की टिप्पणियाँ अक्सर वायरल हो जाती हैं। अनुपम जी से मात्र बीस-बाईस मिनट की भेंट ही मुझे समृद्ध कर गई।

रेलवे स्टेशन पर मैं गाड़ी आने से दस मिनट पहले ही पहुंच गया। यहाँ मुझे Hitesh Kumar Singh जी से मिलने की उम्मीद थी। अपनी रेलवे की व्यस्त नौकरी के साथ साथ वे साहित्य साधना में लगे रहते हैं। प्रयाग-पथ नाम से 'साहित्यिक कला और संस्कृति का संचयन' संपादित और प्रकाशित करते हैं। कुल पांच मिनट की भेंट में उन्होंने मुझे दिसंबर-२०२५ में प्रकाशित प्रयाग-पथ का कृष्णा सोबती पर केंद्रित जन्मशती विशेषांक भेंट किया। इसमें विभूतिनारायण राय का कृष्णा सोबती जी के संबंध में रोचक आलेख प्रमुखता से छपा है। दूसरे संस्मरण और समीक्षाएं भी है। एक संग्रहणीय अंक मेरे हाथ लगा है। आप भी इसे खोजकर पढ़िए। 

इन दो यादगार मुलाकातों की तस्वीर भी लगा देता हूँ। 'अहा इलाहाबाद' से 'प्रिय प्रयाग' तक मेरे लिए जादू है जादू।

सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी