कल कार्तिक पूर्णिमा के पवित्र अवसर पर हरिद्वार में हरकीपैड़ी पर गंगास्नान का सौभाग्य मिला। उसके बाद अपार संख्या में जुटे श्रद्धालुओं के बीच गंगा जी की आरती का दर्शन करके मन तृप्त हुआ।
नमामि गंगे, तव दर्शनार्थ मुक्तिः।
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सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी का ब्लॉग
कल कार्तिक पूर्णिमा के पवित्र अवसर पर हरिद्वार में हरकीपैड़ी पर गंगास्नान का सौभाग्य मिला। उसके बाद अपार संख्या में जुटे श्रद्धालुओं के बीच गंगा जी की आरती का दर्शन करके मन तृप्त हुआ।
नमामि गंगे, तव दर्शनार्थ मुक्तिः।
नवदुर्गा की अवधारणा में स्त्री के जन्म से लेकर प्रौढ़ावस्था तक के नौ रूप माँ दुर्गा के बताए गए हैं।
1. शैलपुत्री 2. ब्रह्मचारिणी 3.
चंद्रघंटा 4. कूष्मांडा 5. स्कंदमाता 6. कात्यायनी 7. कालरात्रि 8. महागौरी 9.
सिद्धिदात्री।
इसमें छठा रूप कात्यायनी के रूप
में हम सबका इस भौतिक संसार में पालन पोषण करने वाली माँ का है। गृहस्थ जीवन के
सुख-समृद्धि का ध्यान रखने वाली माँ कात्यायनी ही छठ मइया हैं।
पंजाब से बिहार जा रही यह रेलगाड़ी
अमृतसर-पूर्णिया एक्सप्रेस जब सहारनपुर में रुकी तो यहां के लाल कुर्ती वाले
कुलियों की बन आई। आपातकालीन खिड़की के रास्ते बिहार जाने वाले यात्रियों को
उठा-उठाकर डिब्बे में ठूस रहे थे। यात्रियों का विश्वास भी देखने लायक था। अपना
बैग कुली को सौंपकर वे प्लेटफॉर्म से सरक चुकी ट्रेन की खिड़की के भीतर समा जाने
को तत्पर थे। उनके भीतर जमा हो जाने के बाद खिड़की से उनका बैग भी अंदर चला ही गया
होगा। कोई कुली धोखा नहीं देता होगा क्या? मेरी आशंका को निर्मूल
बताते हुए एक कुली ने पूछने पर कन्फर्म किया कि 20 साल से यह काम कर रहे हैं लेकिन
एक भी बैग पीछे नहीं छूटा।