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मंगलवार, 3 जून 2025

साइकिल से सैर 03 जून 2025

 #साइकिल_से_सैर की आज की कड़ी में हम विश्वविद्यालय से निकल कर पुंवारका से सुंदल हेड़ी गांव की ओर जाने वाली पक्की सड़क पर चल पड़े। आगे इसे एक पतली सी नहर के ऊपर से गुजरते देख हमने बायीं ओर मुड़कर नहर की कच्ची पटरी पकड़ ली। नहर में थोड़ा-बहुत पानी था जिसका प्रयोग आजकल गन्ने की सिंचाई और धान की बेहन तैयार करने में किया जा रहा है। वैसे यहां बिजली मोटर से चलने वाले ट्यूब वेल भी बड़ी संख्या में क्रियाशील हैं। धान की रोपाई के लिए खेतों को जोतकर और खर पतवार  की सफाई करके छोड़ दिया गया है। प्रतीक्षा है धान के बेहन तैयार होने की और मानसून के आने की। दस-पंद्रह दिन बाद रोपाई शुरू हो जाएगी।

इसके अतिरिक्त गन्ने के हरे-भरे खेत खूब लहलहा रहे हैं। पॉपलर की खेती भी खूब होती है। कुछ किसान खेतों में तो गन्ना या अनाज की खेती करते हैं लेकिन साथ में पॉपलर के पेड़ खेतों की मेड़ पर लगाकर अतिरिक्त नगदी का इंतजाम भी कर लेते हैं। सड़क की दोनों ओर सीधी रेखा में तनकर खड़े इन पेड़ों की हरियाली देखते बनती है। इनके बीच साइकिल से गुजरने पर फेफड़े ताजी और शुद्ध ऑक्सीजन से भर जाते हैं।

इस समय आम के बाग भी अच्छी पैदावार की संभावना से खूब खिलखिला रहे हैं। आम की रखवाली के लिए अस्थाई टेंट लग गए हैं। मैने एक बाग में जाकर बुजुर्ग रखवाले से कच्चे आम लिए। हरी मिर्च, पुदीना, लहसुन, व अदरक के साथ कच्चे आम की चटनी भोजन का जायका खूब बढ़ा देती है। लेकिन इस बार मैने इसे गुड़ के साथ पकाकर मीठी चटनी बनाने का अनुरोध अपने रसोइए से किया है।

मैं इसके स्वाद की प्रतीक्षा करता हूँ। आप लोग तस्वीरों का आनंद लीजिए।










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