हमारी कोशिश है एक ऐसी दुनिया में रचने बसने की जहाँ सत्य सबका साझा हो; और सभी इसकी अभिव्यक्ति में मित्रवत होकर सकारात्मक संसार की रचना करें।

Saturday, September 13, 2008

आइए हिन्दुस्तानी एकेडेमी में...

“रात भर कम्प्यूटर पर बैठकर क्या किया जी?” …पत्नी ने सुबह-सुबह जगा कर पूछा।

“क्या मतलब?” मैं आँखे मलते हुए उठ बैठा।

“कोई नयी पोस्ट तो दिख नहीं रही है!” रातभर खटर-पटर का नतीजा सिफ़र…!

हिन्दुस्तानी एकेडमी का काम कर रहा था।” मैने बताया।

ये कौन सा नया काम शुरू कर दिया? सत्यार्थमित्र क्या कम था, जो एक और नया ब्लॉग…

अरे यार, ये मेरा ब्लॉग नहीं है। इसको तो बस शुरू किया है मैने… इसमें लिखने वाले और दूसरे लोग होंगे। यह एक बड़ा प्रोजेक्ट है,… अगर चल निकला तो…

“तो… फिर आपने दो बजे तक किया क्या?”

मैने इसका नया ब्लॉग बना दिया है… और पहली पोस्ट लिखकर डाल दी है… बस।

“अच्छा; …अब आगे?”

“आगे की वो जानें, जिन्हें हिन्दी से प्यार है, लगाव है, या कहें इसके लिए एक जुनून है… अब तो वे ही इसे आगे बढ़ाएंगे…”

“चलिए हमारी भी शुभकामनाएं, इस सामूहिक प्रयास की सफलता के लिए…। …लेकिन ये हिन्दुस्तानी एकेडमी है क्या?”

“सब कुछ जानना है तो उस ब्लॉग पर जाने का कष्ट करो जी… धीरे-धीरे सब पता चल जाएगा। ...अभी तो बस शुरुआत है|”


तो मित्रों, ये है संवाद आज अलस्सुबह का। पिछले चार पाँच दिनों से ब्रॉडबैण्ड ने इतना दुःखी कर रखा था कि कम्प्यूटर पर बैठना सम्भव नहीं हो पा रहा था। न कोई पोस्ट, ना कोई टिप्पणी… बस डायल करते जाइए, लिंक फेल का फेल ही रहा। अन्ततः जब कल शाम लाइन ठीक हुई तो रात भर का प्रोग्रॉम बना डाला। सोचा था ढेर सारी पोस्टें पढ़ूंगा, गूगल रीडर में लगा लम्बा जाम हटाऊँगा, खूब टिप्पणियाँ लिखूंगा, और मौका मिला तो नयी पोस्ट का सूखा भी दूर करूंगा...।

...लेकिन मैने रात भर जो किया, उसमें यह कुछ भी नहीं हो सका। फिरभी मुझे अफ़सोस नहीं है, क्योंकि हिन्दुस्तानी एकेडेमी को आप लोगों के बीच लाकर मुझे बहुत प्रसन्नता हो रही है। अलबत्ता तकनीकी कौशल की कमीं से अभी वहाँ बहुत कुछ किया जाना शेष है जिसके लिए आप सभी का सहयोग अपेक्षित है।

तो देर किस बात की… दोनो हाथों से स्वागत कीजिए इस गौरवपूर्ण संस्था के नये कदम का…।

12 comments:

  1. यह बहुत अच्छा है। होने वाले विभिन्न व्याख्यानों/गोष्ठियों की अग्रिम जानकारी ब्लॉग पर मिले तो इलाहाबादी लोग फायदा ले सकते हैं।
    त्रैमासिक पत्रिका के मुख्य अंश उपलब्ध करवयें पोस्टों के माध्यम से।
    आपके उत्साह में उत्तरोत्तर बढ़ोतरी हो! अच्छा मिशन लिया है आपने!

    ReplyDelete
  2. बहुत ही सुंदरतम और सराहनीय प्रयास। हमारी शुभकामनाएँ।

    ReplyDelete
  3. बधाई! नेक प्रयास!

    ReplyDelete
  4. सिद्धार्थजी
    बहुत अच्छा काम किया है आपने। कोशिश करके कुछ सहभागिता भी करूंगा।

    ReplyDelete
  5. अभी देखे आते हैं.

    ReplyDelete
  6. बहुत नेक काम ,मेरी शुभकामनाएं !

    ReplyDelete
  7. आपको हार्दिक शुभकामनाऍं।

    ReplyDelete
  8. बधाई एवं शुभकामनाएं....अच्छी कोशिश है!

    ReplyDelete
  9. bahut hi umda sarahaniy prayas hai . swagat hai blaag jagat me .

    ReplyDelete
  10. बधाई एवं शुभकामनाएं....

    ReplyDelete

आपकी टिप्पणी हमारे लिए लेखकीय ऊर्जा का स्रोत है। कृपया सार्थक संवाद कायम रखें... सादर!(सिद्धार्थ)