" आज शायद सभी भारतीय नागरिक की ऑंखें नम होंगी और इसी असमंजस की स्थति भी, हर कोई आज अपने को लाचार बेबस महसूस कर रहा है और रो रहा है अपनी इस बदहाली पर ..."ईश्वर मारे गए लोगों की आत्मा को शान्ति प्रदान करें . उनके परिजनों को दु:ख सहने की ताकत दें .
अपनी एक जुटता का परिचय दे रहा हैं हिन्दी ब्लॉग समाज । आप भी इस चित्र को डाले और अपने आक्रोश को व्यक्त करे । ये चित्र हमारे शोक का नहीं हमारे आक्रोश का प्रतीक हैं । आप भी साथ दे । जितने ब्लॉग पर हो सके इस चित्र को लगाए । ये चित्र हमारी कमजोरी का नहीं , हमारे विलाप का नहीं हमारे क्रोध और आक्रोश का प्रतीक हैं । आईये अपने तिरंगे को भी याद करे और याद रखे की देश हमारा हैं ।
" शोक व्यक्त करने के रस्म अदायगी करने को जी नहीं चाहता. गुस्सा व्यक्त करने का अधिकार खोया सा लगता है जबआप अपने सपोर्ट सिस्टम को अक्षम पाते हैं. शायद इसीलिये घुटन !!!! नामक चीज बनाई गई होगी जिसमें कितनेही बुजुर्ग अपना जीवन सामान्यतः गुजारते हैं........बच्चों के सपोर्ट सिस्टम को अक्षम पा कर. फिर हम उस दौर सेअब गुजरें तो क्या फरक पड़ता है..शायद भविष्य के लिए रियाज ही कहलायेगा।"
शोक व्यक्त कर क्या होगा? जो कुछ नहीं कर सकते, उनपर सब कुछ करने की जिम्मेदारी है, और जो कुछ करना चाहते हैं, उनके हाथ खाली. सभी यहाँ यूज्ड-टू हो चुके हैं. हमारे सब्र का इम्तहान लेने वाले ख़ुद फेल हो चुके, सौहार्द और महानता की जड़ें इतनी गहरी हैं, कोई उखाड़ कर तो देखे.
ज्यादा नहीं कहूँगा. अगले धमाकों के लिए भी थोड़ा बचा कर रखना है.
अगले धमाको को हम सब मिल कर रोक सकते है, हमे जागरुक होना चाहिये, अपने आस पास कोई भी अन्जान हमे दिखे कुछ गलत करता तो उसे पकडो ओर पुछो, आप के पडोस मै कोई नया ओर संगिध सा दिखने वाला कोई भी हो उस की रिपोर्ट पुलिस को दो, आप सब इलाके के लोग भी उस से पुछ ताछ कर सकते है, कोई कुछ समान फ़ेक कर , या छोड कर जाये तो समान नही उस आदमी को पकडो सब मिल कर, अगर कोई भी आतंकवादियो से सहानुभुति दिखाये उसे पकड कर .... ओर सब अपने अपने वोट का हक जरुर पुरा करो यानि वोट जरुर डालो.... ताकि यह कमीने नेता सिर्फ़ वोट वेक के लिये देश की भावनायो से ना खेले, इन्हे भी पता चले की वोट किसी विशेष तबके से नही मिलते , आओ ओर देश के लिये जागरुक होये, जात पात, ओर धर्म से ऊपर उठे, ओर अपने देश को बचाये,
माँ-बाप के दिए संस्कारों के साथ इलाहाबाद विश्वविद्यालय से दर्शनशास्त्र में परास्नातक की शिक्षा पूरी होते-होते सरकारी नौकरी मिल गयी। ईश्वर की कृपा और बुजुर्गों के आशीर्वाद से जीवन में ‘कठिन संघर्ष’ जैसा कुछ महसूस नहीं हुआ। बस ईमानदारी और अनुशासन से अपना काम करते रहने की आदत से मन संतुष्ट रहता है। लेकिन कभी-कभी यह शेर हॉन्ट करता है -
“जिन्दगी में ज़ौक क्या कारे-नुमाया कर गये
बीए किया नौकर हुए पेंशन मिली और मर गये”
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*‘समकालीन अभिव्यक्ति’ का संयुक्तांक *
‘समकालीन अभिव्यक्ति’ का नया अंक (अंक 94-95, वर्ष- 23, अप्रैल-सितंबर, 2025)
प्रकाशित होकर मध्य मार्च में आ गया था। क...
कालीन का कारीगर
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गुन्नीलाल जी के यहाँ से लौट रहा था। सवेरे साढ़े आठ का समय। धूप अभी तीखी
नहीं हुई थी। सामने एक आदमी साइकिल पर था — सिर पर गमछे का फेंटा बाँधे, पीठ
सीधी, पीछ...
Vishnu Puran - Part 001 विष्णु पुराण - भाग 001
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विष्णु पुराण - भाग 001सृष्टि और दिव्य प्रेम की एक सुंदर यात्रा: विष्णु
पुराण पर चिंतनआज हम 'विष्णु पुराण' पर आधारित एक शृंखला की शुरुआत कर रहे
हैं। यह कहान...
नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला 2026
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जनवरी 10 से 18 तक ,भारत मंडपम (प्रगति मैदान ) दिल्ली में आयोजित नई दिल्ली
विश्व पुस्तक मेला 2026 साहित्य प्रेमियों के लिए एक भव्य और प्रेरणादायक
आयोजन ह...
किताब मिली -शुक्रिया -23
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तुम आए और यहां बोस्की के थान खुले
ये कौन भूल गया उन लबों का ख़ाका
यहां ये कौन छोड़ गया गुड़ के मर्दबान खुले
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ब...
गाह-2 : जब डुबकी ही शुभारम्भ कहलाती थी
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*संकल्प और शुरुआत का एक नाम: आग़ाज*
*संकल्प और इच्छाशक्ति की दूरगामी सोच*‘आरम्भ’ और ‘प्रारम्भ’ जैसे शब्द किसी
कार्य के अनुष्ठान की सूचना देते हैं, तो ‘श...
महिला दिवस पर आत्ममुग्ध
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का समय और श्रीमान जी की परदेसी नौकरी। मैं तो बस सोशल मीडिया और फोन के सहारे
घ...
बाग में टपके आम बीनने का मजा
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मेरे मित्र प्रोफेसर Sandeep Gupta पिछले दिनों अपने बाग के आम लेकर आए थे।
उनके साथ मैं पहले बाग देखकर आया था लेकिन तब आम कच्चे थे। बरौली से 2
किलोमीटर पहल...
डॉल्बी विजन देखा क्या?
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इससे पहले, अपने पिछले आलेख में मैंने आपसे पूछा था – डॉल्बी एटमॉस सुना क्या?
यदि आपने नहीं सुना, तो जरूर सुनें.
अब इससे आगे की बात –
डॉल्बी विजन देखा क...
सज्जन-मन
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सब सहसा एकान्त लग रहा,
ठहरा रुद्ध नितान्त लग रहा,
बने हुये आकार ढह रहे,
सिमटा सब कुछ शान्त लग रहा।
मन का चिन्तन नहीं व्यग्रवत,
शुष्क हुआ सब, अग्नि त...
thinking of my father ऐसे ही
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नागेन्द्र हाराय त्रिलोचनाय भस्माङ्गरागाय नमश्शिवाय
...
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शास्त्रसम्मत है भी या न...
कथा "मीराँबाई पर विशेष"
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कभी-कभी कुछ चीज़े विशेष होती हैं, और आपसे लिखवाकर ही दम लेती हैं, ज़िक्र होना
भी चाहिए, किसी भी रचना को लिखने के बाद, या पुस्तक के प्रकाशन के बाद उस पर
प...
तुम्हारे लिए
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मैं उसकी हंसी से ज्यादा उसके गाल पर पड़े डिम्पल को पसंद करता हूँ । हर सुबह
थोड़े वक्फे मैं वहां ठहरना चाहता हूँ । हंसी उसे फबती है जैसे व्हाइट रंग ।
हाँ व्...
कल्पना...!
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छत पर सूखते कपड़ों से रह-रह कर टपक रहे पानी के छीटों से परेशान चींटी कभी
दायें ओर मुड़ती-कभी बायें ओर। एकाध बार ठहर भी गई लेकिन छींटे थे कि फिर से
आगे ज...
कृष्ण अस्त्र
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कुमुद कौमुदी गदा देवी,
सहस्रार चक्र सु-दर्शन,
वनमृग शृङ्ग शार्ङ्ग चाप,
पाञ्चजन्य पञ्चजन आह्वान -
मैं जीवन में एक बार
केवल एक बार
हुआ स्तब्ध !
कुरु सखी पा...
रिश्ते...
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ब्लाॅग लिखने से बढ़िया कुछ नहीं...:-) :-) _______________________________
वक़्त की साज़िश से, रिश्ते पनप तो जाते हैं, मगर उनको कहानी बनते, देर नहीं
लगती .....
परेशाँ रात सारी है ...... क़तील शिफाई
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* परेशाँ रात सारी है सितारों तुम तो सो जाओहमें ये रात भारी है सितारों तुम
तो सो जाओ तुम्हें क्या आज भी कोई अगर मिलने नहीं आयाये बाज़ी हमने हारी है
स...
Demonetization and Mobile Banking
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*स्मार्टफोन के बिना भी मोबाईल बैंकिंग संभव...*
प्रधानमंत्री मोदीजी ने अपनी मन की बात में युवाओं से आग्रह किया है कि हमें
कैशलेस सोसायटी की तरफ बढ़ना है औ...
मछली का नाम मार्गरेटा..!!
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मछली का नाम मार्गरेटा..
यूँ तो मछली का नाम गुडिया पिंकी विमली शब्बो कुछ भी हो सकता था लेकिन मालकिन
को मार्गरेटा नाम बहुत पसंद था.. मालकिन मुझे अलबत्ता झल...
PARYAAWARAN
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पर्यावरण - मुसीबत के बोल ?पिछले दिनों रिज़र्वेशन नहीं मिला. अतः वीडियो
कोच बस से लम्बी यात्रा करनी पड़ी . इंदौर से मुंबई की यात्रा के दौरान एक
फिल्म देखने का...
दैवीय आपदा.......
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देवताओं के दाढ़ी और मूँछें नहीं होती थीं ।
वे हमसे ताकतवर थे ।
उनको युद्ध में हराना मुश्किल था लेकिन असंभव नहीं । रावण के डर से वे थरथर
काँपते थे ।
......
तेरी याद में -सतीश सक्सेना
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*हम जी न सकेंगे दुनियां में *
*माँ जन्मे कोख तुम्हारी से *
*जो दूध पिलाया बचपन में ,*
*यह शक्ति उसी से पायी है *
*जबसे तेरा आँचल छूटा,**हम हँसना अम्मा भूल ...
अदम जी मुझे लौकी नाथ कहते थे
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जयपुर में अदम जी मंच संचालन कर रहे थे। मुझे कविता पढ़ने बुलाने के पहले एक
किस्सा सुनाया। किसी नगर में एक बड़े ज्ञानी महात्मा थे। उनका एक शिष्य था नाम
था...
काव्य संग्रह- केदार सम्मान के कवि
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हिंदुस्तानी एकेडेमी की अनुपम भेंट
*‘केदार शोध पीठ न्यास’* द्वारा प्रतिवर्ष समकालीन हिंदी कवियों में से ऐसे
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BHOPAL TRAGEDY
The main issue in revived Bhopal Tragedy is somewhat muffled. Arjun singh
was made scape goat as everybody knew that he will not let down ...
मानव सभ्यता को भारत का योगदान: कुछ रोचक तथ्य
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भारत से सम्बन्धित कुछ रोचक तथ्य एक जर्मन पत्रिका में प्रकाशित हुए थे
जिन्हें अंग्रेजी साप्ताहिक ‘ऑर्गनाइजर’ ने मई २००७ में रिपोर्ट किया था। हाल
ही में...
मेरी पहली पोस्ट: वरिष्ठ चिठेरों के नाम...
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मेरे मन में हमेशा कुछ अनूठा करने की चाह रही है। *ताजा हवाएँ* की नीव ही डाली
थी मैने कुछ ताजगी पैदा करने के लिए। लेकिन राह आसान नहीं थी। अयोध्यावासी
जमुना...
उद्देशिका
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जीवन को देखकर अबतक जो समझा है उसे लिपिबद्ध करने का एक माध्यम प्राप्त हुआ
है। विचारों की सर्वसमीक्षा के उपरान्त प्राप्त निष्कर्ष प्रायः सत्य के करीब
होते है...
" आज शायद सभी भारतीय नागरिक की ऑंखें नम होंगी और इसी असमंजस की स्थति भी, हर कोई आज अपने को लाचार बेबस महसूस कर रहा है और रो रहा है अपनी इस बदहाली पर ..."ईश्वर मारे गए लोगों की आत्मा को शान्ति प्रदान करें . उनके परिजनों को दु:ख सहने की ताकत दें .
जवाब देंहटाएंअपनी एक जुटता का परिचय दे रहा हैं हिन्दी ब्लॉग समाज । आप भी इस चित्र को डाले और अपने आक्रोश को व्यक्त करे । ये चित्र हमारे शोक का नहीं हमारे आक्रोश का प्रतीक हैं । आप भी साथ दे । जितने ब्लॉग पर हो सके इस चित्र को लगाए । ये चित्र हमारी कमजोरी का नहीं , हमारे विलाप का नहीं हमारे क्रोध और आक्रोश का प्रतीक हैं । आईये अपने तिरंगे को भी याद करे और याद रखे की देश हमारा हैं ।
जवाब देंहटाएंसही कह रहे हैं - बहुत हो चुका।
जवाब देंहटाएंपर आसपास देखता हूं तो फ्रेगमेण्टेड समाज। आशा नहीं बन्धती।
" शोक व्यक्त करने के रस्म अदायगी करने को जी नहीं चाहता. गुस्सा व्यक्त करने का अधिकार खोया सा लगता है जबआप अपने सपोर्ट सिस्टम को अक्षम पाते हैं. शायद इसीलिये घुटन !!!! नामक चीज बनाई गई होगी जिसमें कितनेही बुजुर्ग अपना जीवन सामान्यतः गुजारते हैं........बच्चों के सपोर्ट सिस्टम को अक्षम पा कर. फिर हम उस दौर सेअब गुजरें तो क्या फरक पड़ता है..शायद भविष्य के लिए रियाज ही कहलायेगा।"
जवाब देंहटाएंसमीर जी की इस टिपण्णी में मेरा सुर भी शामिल!!!!!!!
प्राइमरी का मास्टर
शोक व्यक्त कर क्या होगा?
जवाब देंहटाएंजो कुछ नहीं कर सकते, उनपर सब कुछ करने की जिम्मेदारी है, और जो कुछ करना चाहते हैं, उनके हाथ खाली. सभी यहाँ यूज्ड-टू हो चुके हैं. हमारे सब्र का इम्तहान लेने वाले ख़ुद फेल हो चुके, सौहार्द और महानता की जड़ें इतनी गहरी हैं, कोई उखाड़ कर तो देखे.
ज्यादा नहीं कहूँगा. अगले धमाकों के लिए भी थोड़ा बचा कर रखना है.
अगले धमाको को हम सब मिल कर रोक सकते है, हमे जागरुक होना चाहिये, अपने आस पास कोई भी अन्जान हमे दिखे कुछ गलत करता तो उसे पकडो ओर पुछो, आप के पडोस मै कोई नया ओर संगिध सा दिखने वाला कोई भी हो उस की रिपोर्ट पुलिस को दो, आप सब इलाके के लोग भी उस से पुछ ताछ कर सकते है,
जवाब देंहटाएंकोई कुछ समान फ़ेक कर , या छोड कर जाये तो समान नही उस आदमी को पकडो सब मिल कर, अगर कोई भी आतंकवादियो से सहानुभुति दिखाये उसे पकड कर ....
ओर सब अपने अपने वोट का हक जरुर पुरा करो यानि वोट जरुर डालो.... ताकि यह कमीने नेता सिर्फ़ वोट वेक के लिये देश की भावनायो से ना खेले, इन्हे भी पता चले की वोट किसी विशेष तबके से नही मिलते , आओ ओर देश के लिये जागरुक होये, जात पात, ओर धर्म से ऊपर उठे, ओर अपने देश को बचाये,
ईश्वर मारे गए लोगों की आत्मा को शान्ति प्रदान करें ...
जवाब देंहटाएंVote and don't forget. Vote with conscience for the right person without blamish of 93 blast, Jaipur, Kandahar, PArliament Bangalore, Hyderabad.
जवाब देंहटाएंso which is the choice.....