पूर्वांचल का छठ महापर्व अब अखिल भारतीय स्वरूप ले चुका है। सात समुंदर पार भी डूबते और उगते सूर्य को अर्घ्य देने का अनुष्ठान देखा जा सकता है। सुदूर पश्चिम सहारनपुर में भी यहां गठित पूर्वांचल सांस्कृतिक सभा ने एक भव्य आयोजन किया। मुझे भी सौभाग्य मिला इस प्रकृति के सामीप्य को रेखांकित करने वाली शक्ति की पूजा में सम्मिलित होने का। जय जय छठ मैया! आप सबका कल्याण करें।
एक रिटायर्ड अधिकारी का साइकिलवाद
-
रेलवे में नौकरी के दिनों की एक छोटी-सी आदत थी, जो तब सामान्य लगती थी।
प्रयागराज या गोरखपुर के रेलवे जोनल मुख्यालय में एक दफ्तर से दूसरे दफ्तर तक
पैदल जाया ...
1 दिन पहले







कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
आपकी टिप्पणी हमारे लिए लेखकीय ऊर्जा का स्रोत है। कृपया सार्थक संवाद कायम रखें... सादर!(सिद्धार्थ)