आज लोहिया पार्क लखनऊ के हरे -भरे वातावरण में प्रातः काल के धुंधलके में पहुंच गया था। आसन बिछाकर ऑनलाइन योगकक्षा से जुड़ गया। कक्षा तो सात चक्रों के संतुलन संबंधी आसनों और उनके जागरण की मुद्राओं की थी। किंतु यहां की मनोरम छटा में कुछ नियमित आसन लगने का लोभ संवरण न कर सका। कुछ झलकियां आपके लिए।
ढाई हजार घरों की चाय
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[ छियालीस साल हो गये हमारी शादी को। याद नहीं आता कि किसी ने सालगिरह के अवसर
पर उपहार दिया हो। इस बार उन लोगों ने दिया जो शादी के समय तो हो नहीं सकते थे
— ह...
1 दिन पहले














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