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मंगलवार, 10 सितंबर 2024

हिंदुस्तान ने मेरे गाँव जवार को पढ़वाई मेरी खबर

माँ शाकुंभरी की कृपा ऐसी हुई कि मुझ अकिंचन को सहारनपुर के इस विश्वविद्यालय में सेवा करने का आदेश मिला। एक नव स्थापित विश्वविद्यालय के लिए बहुत कुछ पहली बार हो रहा था। मुझे उस सबका साक्षी बनते हुए उसमें कुछ योगदान करने का भी अवसर मिला। देवी की कृपा से कुलगीत की रचना हुई जिसके लिए महामहिम राज्यपाल से प्रशस्ति और पुरस्कार की प्राप्ति हुई। इस सौभाग्य के क्षण का समाचार यहाँ से लगभग 1000 किलोमीटर दूर मेरे पैतृक गाँव जनपद कुशीनगर में पहुँचने वाले अखबार में भी छप गया। अब मन बल्लियों उछल रहा है।

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