माँ शाकुंभरी की कृपा ऐसी हुई कि
मुझ अकिंचन को सहारनपुर के इस विश्वविद्यालय में सेवा करने का आदेश मिला। एक नव
स्थापित विश्वविद्यालय के लिए बहुत कुछ पहली बार हो रहा था। मुझे उस सबका साक्षी
बनते हुए उसमें कुछ योगदान करने का भी अवसर मिला। देवी की कृपा से कुलगीत की रचना
हुई जिसके लिए महामहिम राज्यपाल से प्रशस्ति-पत्र और नकद पुरस्कार की प्राप्ति हुई। इस
सौभाग्य के क्षण का समाचार यहाँ से लगभग 1000 किलोमीटर दूर मेरे पैतृक गाँव जनपद
कुशीनगर में पहुँचने वाले अखबार में भी छप गया। अब मन बल्लियों उछल रहा है।
सुनि सिसु रुदन परम प्रिय बानी | Ramcharitmanas Balkand (192-195) | श्रीराम
जन्मोत्सव 🕉️
-
🕉️ श्रीराम जन्मोत्सव 🕉️ सुनि सिसु रुदन परम प्रिय बानी |श्रीरामचरितमानस:
बालकाण्ड (दोहा 192 से 195)इस संगीतमय प्रस्तुति को यूट्यूब पर यहाँ सुनें
: सुनि स...
3 दिन पहले



कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें
आपकी टिप्पणी हमारे लिए लेखकीय ऊर्जा का स्रोत है। कृपया सार्थक संवाद कायम रखें... सादर!(सिद्धार्थ)