हमारी कोशिश है एक ऐसी दुनिया में रचने बसने की जहाँ सत्य सबका साझा हो; और सभी इसकी अभिव्यक्ति में मित्रवत होकर सकारात्मक संसार की रचना करें।

शुक्रवार, 17 फ़रवरी 2012

बसंत में निकला चुनाव गीत…

india_electionsआजकल राज्यों के चुनाव अपने उत्स पर हैं। शुरुआती दौर के आँकड़े बताते हैं कि इस बार मतदाताओं ने जोर-शोर से वोटिंग में हिस्सा लिया है और मतदान प्रतिशत का रिकॉर्ड बना दिया है। इस दौर में उत्साहजनक बात यह भी है कि महिला मतदाताओं ने अधिक बढ़-चढ़कर वोट डाले हैं। जानकारों की राय है कि इस कारण चुनाव परिणाम अचंभित करने वाले हो सकते हैं।

मैं यहाँ लखनऊ में सरकारी नौकरी की सीमाओं में बँधकर प्रायः मताधिकार का प्रयोग करने से वंचित रह जाता हूँ। मेरा नाम अपने पैतृक गाँव की मतदाता सूची में सम्मिलित है। वहाँ से नाम कटाने और लखनऊ में जुड़वाने की बात चलती है तो मैं गाँव में अपनी पहचान को लेकर भावुक हो जाता हूँ इसलिए स्थिति यथावत्‌ बनी रहती है। बहरहाल इस बार भी जब गाँव में वोट पड़ रहे थे और मैं लखनऊ में मन मसोसकर सरकारी काम निपटा रहा था तो बेचैनी के बीच एक रचना का अंकुर फूट पड़ा। दिल तो मेरा गाँव में ही भटक रहा था; इसलिए वहाँ का चुनावी माहौल वहीं की बोली में शब्दों के बीच उभर आया। आज वह अंकुर विकसित होकर एक पूरा गीत बन गया है। आप भी सुनिए बसन्ती माहौल में मेरे गाँव का आँखों देखा हाल जो शायद आपके गाँव का भी हो :

 चुनाव गीत

   धानी रंग चुनरी में लाले-लाल गोटवा
   जा ताड़ी गोरी देखऽ डारे आजु वोटवा

   धाँधली के राज रऽहल
   खर्ची अकाज रऽहल
   राशन के दुकानी से
   ग़ायब अनाज रऽहल
   नेता-ठेकेदार सगरी लूटि लिहलें कोटवा
   जा ताड़ी गोरी देखऽ डारे आजु वोटवा

   नेता गाँव-गाँव घूमें
   गरीबन के पाँव चूमें
   जाति के, बिरादरी के
   लेके नाँव नाचें झूमें
   दारू बाँटें, साड़ी बाँटें, अ‍उरी बाँटें नोटवा
   जा ताड़ी गोरी देखऽ डारे आजु वोटवा

   शेषन कमीशन भ‍इलें
   वोट-चोरी बन्द क‍इलें 
   बूथे पर मशीन लागल
   वोट पड़े बटन दब‍इले
   फ़र्जी मतदान के अब घटल बा रिपोटवा
   जा ताड़ी गोरी देखऽ डारे आजु वोटवा

   पाँच बरिस ठाट क‍इलें
   लूट-चोरी-घाट क‍इले
   मंत्री जी खजाना से
   खूब बंदर-बाँट कइलें
   कोर्ट-सी.बी.आई. के अब पड़ऽताटे सोटवा
   जा ताड़ी गोरी देखऽ डारे आजु वोटवा

   हाथी से पंजा लऽड़ल
   फूले पर सैकिल चऽढ़ल
   धरम के आरक्षण पर
   बहुतै तकरार बढ़ल
   बाबा रामदेव कूदें बान्हि के लंगोटवा
   जा ताड़ी गोरी देखऽ डारे आजु वोटवा

   धानी रंग चुनरी में लाले-लाल गोटवा
   जा ताड़ी गोरी देखऽ डारे आजु वोटवा

(सिद्धार्थ)         

रविवार, 12 फ़रवरी 2012

आशा जगाती एक सार्थक पहल (KGBV)

भारत सरकार या उत्तर प्रदेश सरकार की चर्चा आजकल अच्छे संदर्भ में कम ही हो रही है। टू-जी स्पेक्ट्रम से लेकर काले धन की चर्चा हो या भ्रष्ट मंत्रियों के चुनाव से पूर्व बर्खास्तगी से लेकर एन.आर.एच.एम. घोटाले की जाँच का मामला हो; रोज ही हम सरकारी महकमे की एक खराब छवि ही देखते-गुनते रहते हैं। ऐसे में तमाम अच्छी बातें लोगों तक नहीं पहुँच पाती जो सरकार के माध्यम से चलाये जा रहे कार्यक्रमों से संभव हो रही हैं। कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय (KGBV)  की योजना एक ऐसी ही लाभकारी योजना है जो अनेक परिवारों में फैली गरीबी, कुपोषण, अशिक्षा और पिछड़ेपन की व्याधियों से ग्रस्त लड़कियों के जीवन का अंधकार एक साथ दूर करने में चमत्कारिक रूप से सक्षम है।

प्राथमिक शिक्षा को संविधान में मौलिक अधिकार का दर्जा मिल जाने के क्रम में भारत सरकार द्वारा सबके लिए अनिवार्य शिक्षा का अधिनियम पारित कर दिये जाने के बाद इस योजना के अंतर्गत अधिकाधिक आवासीय विद्यालय खोले जाने का काम किया जा रहा है। दस से चौदह वर्ष की गरीब निराश्रित लड़कियों को स्कूली शिक्षा के साथ-साथ उनके पालन-पोषण की जिम्मेदारी भी सरकार द्वारा उठायी जा रही है। उन्हें स्कूल के हॉस्टेल में सरकारी खर्चे पर रखा जाता है। उनका भोजन, कपड़ा, बिस्तर, साबुन, तेल, टूथब्रश, मंजन सबकुछ सरकार के खर्चे पर उपलब्ध कराया जाता है। प्रशिक्षित वार्डेन और शिक्षिकाओं द्वारा न सिर्फ़ उनको उनकी कक्षा का पाठ्यक्रम पढ़ाया जाता है बल्कि उनके व्यक्तित्व के सर्वांगीण विकास के लिए खेल-कूद, गीत-संगीत, कला-संस्कृति, रोजगारपरक प्रशिक्षण इत्यादि की व्यवस्था भी सरकार द्वारा की जाती है।

यह सबकुछ होता है भारत सरकार द्वारा वित्त पोषित और प्रदेश सरकारों द्वारा चलाये जा रहे ‘सर्व शिक्षा अभियान’ के अंतर्गत। सर्व शिक्षा अभियान परियोजना पर यूँ तो हजारो करोड़ रूपये खर्च हो रहे हैं जिनसे प्राथमिक शिक्षा का ढाँचा विकसित करने, शिक्षकों व शिक्षामित्रों की नियुक्ति करने, स्कूलों के भवन बनवाने व अन्य स्थापना सुविधाएँ जुटाने का काम हो रहा है, लेकिन समाज के सबसे पिछड़े वर्ग के लिए जो उपादेयता ‘कस्तूरबा विद्यालय’ की है वह कहीं और नहीं। एक लोक कल्याणकारी राज्य की अवधारणा इस विद्यालय मे आकर साकार रूप लेती दिखती है।

हाल ही में मैं भारत सरकार की ओर से गठित एक अध्ययन टीम के सदस्य के रूप में राजस्थान के एक ऐसे ही कस्तूरबा विद्यालय (KGBV) को देखने गया। वहाँ रहने वाली बच्चियों को देखकर लगा कि सरकार ने वास्तव में बहुत ही सार्थक योजना का प्रारम्भ किया है।

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हमने स्कूल और छात्रावास के सम्मिलित प्रांगण में लगभग दो घंटे बिताया। वहाँ की छात्राओं, शिक्षिकाओं व अन्य कर्मचारियों से बात की। निश्चित रूप से हमारे वहाँ जाने की पूर्व सूचना उन्हें थी; और उन्होंने इस बावत विस्तृत तैयारी भी कर रखी थी; लेकिन हमने सच्चाई जानने के लिए छात्राओं से अलग से भी बात किया। कर्मचारियों से सवाल पूछे। सूक्ष्म निरीक्षण करते हुए प्रांगण के कोने-कोने में गये। रसोई घर से लेकर क्लासरूम तक और हॉस्टल के हॉलनुमा कमरों से लेकर आँगन में बने छोटे से मंदिर तक। कम संसाधनों के बावजूद सबकुछ यथासम्भव सुरुचिपूर्वक ढंग से व्यवस्थित किया गया था। सामान्य मानवीय कमजोरियाँ तो सबजगह होती हैं लेकिन उनके बावजूद वहाँ जाकर हमें बड़ा संतोष मिला। प्रायः निराश्रित लायी गयी उन लड़कियों को इस शिक्षा मंदिर के प्रांगण में हँसते-खिलखिलाते, उछलते-कूदते, जीवन के पाठ सीखते और शिक्षा का प्रकाश बटोरते देखकर हम धन्य हुए।

(सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी)

रविवार, 1 जनवरी 2012

जाओ जी, अच्छा है…

 

happy_new_year_2012_by_abu_hany-d4ksy1k_largeअच्छा जी, जाओ !

बड़ी राहत मिलेगी शायद
तुमने एक साल तक हमें परेशान रखा
कितने करोड़
नहीं, कितने अरब
या उससे भी कहीं ज्यादा
चोर उड़ा ले गये

चोर नहीं, डकैत कहना चाहिए
सबकी आँखों के सामने ही तो लूट होती रही
मीडिया जानती थी
टीवी पर रोज डिबेट होती थी
पत्रकार रपट देते थे
सी.ए.जी. की ऑडिट बताती थी
बाबा भी चिल्‍लाते रहे
अन्ना भी अनशन करते रहे
लेकिन तुमने सब हो जाने दिया
नामाकूल !

संसद की दीवारों के भीतर 
लोकतंत्र को कैद करने की कोशिश
फिलहाल सफल हो जाने दी तुमने
रामलीला मैदान और जंतर मंतर  की हुंकार
बन गयी
नक्कारखाने में तूती की आवाज
भ्रष्टतंत्र को तुमने जीत जाने दिया 
तुमने थका दिया इतना कि
लोकतंत्र को बुखार आ गया
थोड़ी सहानुभूति के शब्द सुनाकर तुम भी चलते बने
कुछ लोगों के साथ

मामूल के मुताबिक
तुम्हारी विदाई पर जश्न का माहौल है
लेकिन किसी खुशफहमी में मत रहना
दर‍असल यह तुम्हारे उत्तराधिकारी के आगमन का जश्न है
तुम्हारे जाने से हम भावुक होकर दुखी हो जाएंगे
ऐसा नहीं है
तुम्हारा तो जल्दी से जल्दी चला जाना ही अच्छा है
बुरा मत मानना
लेकिन यह बता देना जरूरी है
तुमने बहुत दुखी किया

बस एक खुशी मिली थी
जब अठ्ठाइस साल बाद एक वर्डकप दिलाया था तुमने
लेकिन इस खेल की एक किंवदन्ती को नहीं दिला सके
एक अदद शतक जो हो सकता था महाशतक
पाजी कहीं के !

तुमसे निजात पाकर
हम नये सिरे से आशा कर सकते हैं
शायद इस बार बिल पास हो जाय
उस कानून का जन्म हो जाय
जिसके लिए एक फकीर ने देश को जगाने का प्रयास किया
शायद उसे इस बार सफलता मिल जाय

लेकिन डर भी है
कौन जाने
तुम्हारे पीछे तुमसे भी ज्यादा
धुर्त और पाज़ी आ रहा हो

इसी लिए हम प्रार्थना कर रहे हैं
अब जो आये वह अच्छा ही आये
नया साल शुभ हो

!!! हार्दिक शुभकामनाएँ !!!

(चित्रांकन : http://weheartit.com/entry/20302771 से साभार)