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Tuesday, October 7, 2008

विकट नतीजे लेकर आयी मेरी छुट्टी... ॥!!

मेरा बेटा सत्यार्थ नाटक की तैयारी में [??:)]

घर खाली है निपट अकेले पड़े हुए है।
बीबी-बच्चे गाँव गये हैं, अड़े हुए हैं॥
मस्त रहा ब्लॉगिंग में, सबने करली कुट्टी।
विकट नतीजे लेकर आयी मेरी छुट्टी॥

बिटिया ने जब छुट्टी का सन्देश सुनाया।
नानी के घर जाने का अरमान बताया॥
मैने सोचा, चलो भली ये गाँव की मिट्टी।
विकट नतीजे लेकर आयी मेरी छुट्टी॥

सोचा था एकान्त रहेगा खूब लिखेंगे।
इतने सारे नये - पुराने ब्लॉग पढ़ेंगे॥
भर लेंगे गीतों, लेखों से अपनी किट्टी।
विकट नतीजे लेकर आयी मेरी छुट्टी॥

बैठे-बैठे बीत गये दिन खाली घर में।
लिख ना पाया, अटक गये लो गीत अधर में॥
बात हुई क्या, गुम क्यों है अब सिट्टी-पिट्टी?
विकट नतीजे लेकर आयी मेरी छुट्टी॥

ना बेटे का हँसना, रोना या चिल्लाना।
ना बेटी का होमवर्क है हमें कराना॥
नाहक हुई पलीद यहाँ जी मेरी मिट्टी।
विकट नतीजे लेकर आयी मेरी छुट्टी॥

सोच रहा हूँ, गाँव चलूँ, उनको ले आऊँ।
वहाँ दशहरा के दंगल में दाँव लगाऊँ ॥
सुनो चिठेरों लेता हूँ कुछदिन की छुट्टी।
विकट नतीजे लेकर आयी मेरी छुट्टी॥

(सिद्धार्थ)

10 comments:

  1. अरे भई बड़ी अद्भुत और मजेदार कविता है यह ...और हम क्या देखते हैं कि एक प्यारे से , खिलंदड़ चेहरे वाली इस पोस्ट पर अभी तक तो कोई भी प्रतिक्रिया नहीं आई...या तो सारे साथी छुट्टी पर चले गए है...या फिर सबने सोचा कि आप तो पोस्ट लिख कर छुट्टी पर जा चुके होंगे , अब आराम से देंगे टिप्पणी :)
    बढ़िया गीत। हमने तो आनेंद उठाया...चिरंजीव के खिले-खिले से चेहरे ने भी मन को प्रसन्न किया....

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  2. विकट नतीजे लेकर आई आपकी छुट्टी....

    सिद्धार्थ जी, आपने चिठेरों को छुट्टी की नोटिस थमा दी...लेकिन बहुत शानदार नोटिस है. आप जल्दी आईये और एक पोस्ट चिरंजीव के नाटक पर लिखिए. हमें इंतजार रहेगा.

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  3. पहली बार आपकी पोस्ट पढने को मिली
    सुंदर कविता
    ना बेटे का हँसना, रोना या चिल्लाना।
    ना बेटी का होमवर्क है हमें कराना॥
    नाहक हुई पलीद यहाँ जी मेरी मिट्टी।
    काफी मर्मस्पर्शी पंक्तियाँ लगी.
    धन्यवाद

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  4. ऐसा ही होता है भाई .अभी देखना रातो को नींद नही आयेगी

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  5. इतनी बढ़िया कविता को हम छु्ट्टी का नोटिस मानने से इंकार करते हैं। यह पीरियड एलडब्लूपी (लीव विदाउट परमीशन) माना जाये!:)

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  6. गुरुदेव, आपका आदेश सिर माथे...।

    आपलोगों के लिए एक पोस्ट शिड्‍यूल करके जा रहा हूँ। शुक्रवार (१०/१०/०८) को सुबह सवा पाँच बजे देखकर टिप्पणी जरूर कीजिएगा। कहीं अजीत जी की बात सही हो गयी तो मेरा श्रम खाली चला गया...।

    सबको प्रणाम, और विजयादशमीं की हार्दिक शुभकामनाएं।

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  7. बढ़िया मजेदार लिख गये. अब छुट्टी मना आइये तब मुलाकात होगी. शुभकामनाऐं.

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  8. Kafi achi lagi kavita aapki. Chutti ka intejar to rahta hai lekin jab vo milti hai adhure kaam adhar mein hi latke rah jate hain. Happy Vijyadashmi ki chutti.

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  9. SIDDHARTHJI, AAPNE ACHCHHI KAVITA LIKHE HAI. AAPKO HAMARE BLOG PAR SADAR AAMANTRAN HAI.....

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  10. वाह जी बल्ले बल्ले

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