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Tuesday, February 24, 2009

त्रिवेणी महोत्सव सम्पन्न... अब ब्लॉगरी

Image065 पिछला पूरा सप्ताह ब्लॉगरी से जुदा होकर त्रिवेणी महोत्सव की धूम में खो जाने वाला रहा। रात में दो-ढाई  से चार बजे तक रंगारग कार्यक्रमों का आनन्द उठाने के बाद घर लौटता, सुबह यथासम्भव जल्दी उठकर बैडमिण्टन कोर्ट जाता, लौटकर नहा-धो तैयार होकर ऑफिस जाता, दिनभर ऊँघते हुए काम निपटाना और शाम होते ही फिर यमुना तट पर सजी महफिल में शामिल हो जाता।

शुरुआत गंगापूजन के बाद जोरदार आतिशबाजी से हुई। फिर जसवीर जस्सी ने पंजाबी पॉप की मस्ती लुटायी। ‘दिल लै गयी कुड़ी गुजरात की’ पर दर्शक झूम उठे।

डोना गांगुली का ओडिसी बैले, राजा हसन और सुमेधा की जोड़ी का फिल्मी गायन और भोर में साढ़े तीन बजे तक चलने वाला मुशायरा दूसरे दिन दर्शकों को बाँधे रखा।

तीसरे दिन भरतनाट्यम शैली में ‘रणचण्डी रानी लक्ष्मी बाई की वीरगाथा’ नृत्यनाटिका देखने के बाद दर्शकों ने सोनू निगम की ‘विजुरिया’  पर दिल खोलकर डान्स किया। दो घण्टे की अद्‌भुत प्रस्तुति में सोनू ने अपनी प्रतिभा से सबको चमत्कृत कर दिया।

चौथे दिन इलाहाबाद के स्कूली बच्चों के नाम रहा। स्थानीय बाल कलाकारों ने अपनी कला से मन को मोह लिया। बॉलीवुड की स्पष्ट छाप इन नन्हें कलाकारों पर देखी जा सकती थी।

अलपवयस्का रीम्पा शिवा ने तबलावादन में जो महारत हासिल कर ली है उसे देख-सुन कर सबने दाँतों तले अंगुली दबा ली। पाचवें दिन ही कॉमेडी सर्कस के चैम्पियन वी.आई.पी. (विजय) ने अपने गले से जो इक्यावन फिल्मी अभिनेताओं और राजनेताओं की आवाज निकाली वह अद्वितीय रही। के.शैलेन्द्र ने किशोर कुमार के गीत हूबहू नकल करके सुनाये और काफी तालियाँ बटोरी।

छठे दिन हर्षदीप कौर ने फिल्मी गीतों पर दर्शकों को खूब नचाया। उसके बाद विराट कवि सम्मेलन सुबह चार बजे तक चला। सुनील जोगी, विष्णु सक्सेना, सरदार मन्जीत सिंह, विनीत चौहान और वेदव्रत वाजपेयी आदि जैसे पन्द्रह कवि खूब सराहे गये।

सातवें और आखिरी दिन सुरमयी शाम की शुरुआत भजन संध्या और शाम-ए-ग़ज़ल को मिलाकर सजायी गयी। सुशील बावेजा, प्रीति प्रेरणा और इनके साथ पं. अशोक पाण्डे के तबले से निकली रामधुन पर दर्शक झूम उठे। इसके बाद के अन्तिम कार्यक्रम ने सर्वाधिक भीड़ बटोरी। विशाल और शेखर की हिट संगीतकार जोड़ी  जब अपने साजिन्दों के साथ स्टेज पर उतरी तो दर्शकों में जोश का जैसे तूफान उमड़ पड़ा। छोटे बच्चों से लेकर बड़े बूढ़े तक लगातार तालियाँ बजाते और थिरकते रहे। कुर्सियों के ऊपर खड़े होकर नाचते गाते युवा दर्शक कार्यक्रम का हिस्सा बन गये।

इस साल का त्रिवेणी महोत्सव हमारे मानस पटल पर एक अविस्मरणीय छाप छोड़ गया।

इस बीच ब्लॉगजगत में काफी कुछ बह गया। वैलेण्टाइन डे के आसपास गुलाबी चढ्ढियाँ छायी रहीं। सुरेश चिपलूकर जी और शास्त्री जी ने इस अभियान पर प्रश्नचिह्न खड़े किए तो बात बढ़ते-बढ़ते कहाँ की कहाँ पहुँच गयी। बहुत सी पोस्टें आयीं। मैने जहाँ तक देखा किसी भी पोस्ट में प्रमोद मुथालिक द्वारा मंगलौर में किए जाने वाले हिंसक कुकृत्य का समर्थन नहीं किया गया। और न ही किसी ब्लॉगर ने शराब खाने में जाकर जश्न मनाने को महिमा मण्डित किया। दोनो बातें गलत थीं और दोनो का समर्थन नहीं हुआ। इसके बावजूद पोस्टों की विषय-वस्तु पर गुत्थम-गुत्थी होती रही। केवल बात कहने के ढंग पर एतराज दर्ज होते रहे। अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, मर्यादा, वर्जना, नैतिकता, संयम, समानता, आदि कि कसौटी पर ‘स्त्री-विमर्श’ होता रहा।

जो चुप रहे उन्हें भी इस पक्ष या उस पक्ष के साथ जोड़ने का प्रयास हुआ। मुझे लगता है कि इस सहज सुलभ माध्यम की प्रकृति ही ऐसी है कि भीतर से कमोवेश एकमत होते हुए भी हमें अनर्गल विवाद की ओर बढ़ जाने का खतरा बना रहता है। कदाचित टीवी चैनेलों की तरह यहाँ भी टी.आर.पी.मेनिया अपने पाँव पसार रहा है। इसीलिए एक-दूसरे पर शंका पर आधारित आरोप-प्रत्यारोप लगते रहते हैं। फिर सफाई देने-लेने का व्यापार चलता रहता है।

क्या ऐसा करके हम ‘बन्दर के हाथ में उस्तरा’ थमाने वाली उक्ति चरितार्थ नहीं कर रहे हैं...?

अन्त में..

विष्णु सक्सेना ने कवि सम्मेलन में अपना सबसे प्रसिद्ध गीत भी सुनाया। यूँ तो उनकी आवाज में सुनने का अलग ही मजा है लेकिन इसके बोल भी बहुत प्यारे हैं। देखिए...

रेत पर नाम लिखने से क्या फायदा
एक आयी लहर कुछ बचेगा नहीं...
तुमने पत्थर का दिल हमको कह तो दिया
पत्थरों पर लिखोगे मिटेगा नहीं...

मैं तो पतझड़ था फिर क्यूँ निमन्त्रण दिया
ऋतु वसन्ती को तन पर लपेटे हुए
आस मन में लिए प्यास मन में लिए
कब शरद आयी पल्लू लपेटे हुए
तुमने फेरी निगाहें अन्धेरा हुआ
ऐसा लगता है सूरज उगेगा नहीं...

मैं तो होली बना लूँगा सच मान लो
तुम दिवाली बनोगी ये आभास दो
मैं तुम्हें सौंप दूंगा तुम्हारी धरा
तुम मुझे मेरे पंखों को आकाश दो
उंगलियों पर दुपट्टा लपेटो न तुम
यूँ करोगे तो दिल चुप रहेगा नहीं...

आँख खोली तो तुम रुक्मिणी सी दिखी
बन्द की आँख तो राधिका सी लगी
जब भी सोचा तुम्हें शान्त एकान्त में
मीराबाई सी एक साधिका तुम लगी
कृष्ण की बाँसुरी पर भरोसा रखो
मन कहीं भी रहे पर डिगेगा नहीं...

विष्णु सक्सेना

16 comments:

  1. त्रिवेणी माहोत्सव की रिपोर्ट पढ़कर मन गदगद हो गया और उस पर से विष्णु जी की यह रचना-भई वाह!! आनन्द ही आनन्द. अब नियमित लिखें, शुभकामनाऐं.

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  2. त्रिवेणी महोत्‍सव का अच्‍छा विवरण दिया है....जानकर खुशी हुई ...कविता भी अच्‍छा लगा...आगे के पोस्‍टों का इंतजार रहेगा।

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  3. त्रिवेणी महोत्‍सव का अच्‍छा विवरण दिया है, पढ़ कर अच्छा लगा...
    रेत पर नाम लिखने से क्या फायदा
    एक आयी लहर कुछ बचेगा नहीं...
    तुमने पत्थर का दिल हमको कह तो दिया
    पत्थरों पर लिखोगे मिटेगा नहीं...
    कविता की ये पंक्तियाँ बहुत कुछ कह गयी.....

    Regards

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  4. सिद्धार्थ जी, हम तो आपको बिलाई लेकर ढूंढने वाले थे अच्‍छा हुआ जो इलाहाबाद में विष्‍णु को सुनते हुए मिल गए। उसे सुनिए मेरा सबसे प्रिय छात्र रहा है। ब्‍लाग के फायदे अब दिखायी देने लगे हैं कि आप किसी भी बात पर प्रतिक्रिया कर सकते हैं, पहले तो समाचार सुनकर या पढ़कर मन मसोस लिया करते थे। मन के गुबार निकल जाने दीजिए लोगों के। ब्‍लाग के कारण हृदय रोग में कमी आ जाएगी।

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  5. आँख खोली तो तुम रुक्मिणी सी दिखी
    बन्द की आँख तो राधिका सी लगी
    जब भी सोचा तुम्हें शान्त एकान्त में
    मीराबाई सी एक साधिका तुम लगी
    कृष्ण की बाँसुरी पर भरोसा रखो
    मन कहीं भी रहे पर डिगेगा नहीं...
    वाह ! मन बासंती बासंती हो गया ! रिपोर्ट के लिए शुक्रिया ! अल्लाहो आबाद ! जय हो !

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  6. sundar vivaran,sundar kavita

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  7. त्रिवेणी महोत्सव में आई हस्तियो के नाम देखकर ही लगता है बहुत बढ़िया रहा होगा आयोजन.. अंत से पहले जो आपने लिखा है वो बिल्कुल सही है.. और आपकी नज़र की दाद देना चाहूँगा.. काफ़ी दूर तक देखा है आपने..

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  8. त्रिवेणी का रंग खूब चढ़ा है कि पोस्ट के भी तीन रंग और तीन चरण हैं; रिपोर्ट, सामयिक ब्लॊगरी पर प्रतिक्रिया और गीत।

    अब हम किस पर क्या कहें, बस सूत्रवाक्य में कहना हो तो - आह से अहा तक सब कुछ।

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  9. त्रिवेणी का रंग वाकई आपको भी रंग गया है...रही बात ब्लॉग जगत की तो चिंता न कीजिये ...कुछ न कुछ महोत्सव तो यहाँ भी चलते रहेगे .

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  10. अच्छा लगा आप की पोस्ट पढ़ कर। हम तो वहां जा ही न पाये!

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  11. सिद्धार्थ जी, आप ने इस त्रिवेणी महोत्‍सव का चित्ररण बहुत ही सुंदर ढंग से खीचां बहुत अच्छा लगा, लेकिन आप ने यह केसे सोछ लिया कि यहां गलत बात का बिरोध किसी ने नही किया, ्बहुत से लोगो ने किया, चलिये अब अगर खिचे हो तो थोडे चित्र भी दिखा दे....
    इस अच्छी पोस्ट के लिये आभार

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  12. तुमने पत्थर का दिल हमको कह तो दिया
    पत्थरों पर लिखोगे मिटेगा नहीं...
    ग़ज़ब पंक्ति है भाई. और रिपोर्टिंग भी धुआन्धार. बधाई.

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  13. priya siddharth jee ,

    bahut din baad apko padha . vahee aanand . chama chahta hoon . vada kiya tha ki bharat aane par aapse milunga .4 maah hone par bhee sambhav naheen hua .ab april me allahabad aane par.

    aanand aaya padhkar. sab kuch apna ilahabaad jo tha .

    raja hasan aur sumedha ne meree nirmanadheen film ke liye bhee gaya hai . nov.07 me mumbai me record kiya tha . geet sheersak ' NAMAMI RAMAM '.

    USME MAINE RAM PAR LIKA , AMEER KHUSROV,KABEER,TULSEE LIKHIT AUR KUCH MERA LIKHA SHAMIL KIYA HAI. SALE KE LIYE STORE ME UPLABDH NA HOGA KYONKI RAM NA BECH PAOONGA. YAH FILM ME TO HOGA HEE AUR CLIMAX KE BACK DROP ME HOGA KINTU CD AUDIO VAGAIRAH ME NAHEEN HOGA . SIRF COMPLEMENTRY AUR HATHON HAATH SAMARPIT.

    SOCHA THA MILNE PAR RAM KE 'PRASAD' SWAROOP AAPKO DOONGA ...............MAGAR YE HO NA SAKA !

    AGAR E-MAIL PAR MERE, PATA BHEJEN TO BHEJOON.

    AAP SAB SE BAANT SAKTE HAIN, ANYA PRATIYAN BANA SAKTE HAIN ,BHENT DE SAKTE HAIN, KISEE BHEE MADHYAM SE 'PRASADIT' KAR SAKTE HAIN SIRF COMMERCIAL UPYOG NAHEEN .IS 'PRASAD' KA COPYRIGHT BHEE ITNA HEE HAI ! MERE BANNER KEE BHENT .

    ' NAMAMI RAMAM ' KA ANTAR RASHTRIYA LOKARPAN 30.JAN.2008 , KO GANDHEE JEE KE SABARMATEE ASHRAM ME USKE TRUTEE LALIT MODEE DWARA HUYEE THEE . DANNY BOYLE ( VAHEE SLUMDOG.....VALE )BHEE SHAYAD HAJIR THE PAR SHAYAD ITNE ' POPULAR NAHEEN THE TAB ISLIYE LAKSCHYA ME NAHEEN AAYE . DURBHAGYA SHAYAD MERA . KHAIR !
    KAL HEE EK MITRA NE ( APNE PRATAP GARH KE ANUPAM SHYAM , JINHONE SLUMDOG ME ABHINAY BHEE KIYA HAI), KAHA KI US SAMAY JO PRATI UNHNE MILEE BAAD ME SUNANE PAR ARTH SAMAJHNE PE BADEE TAREEF KEE AUR YAH BHEE KI 100% BHARTEEYA VADYA YANTRA KA ISTEMAL, SANKH SAHIT , KIYA GAYA HAI .

    BAHARHAAL 'MAA' KEE IKSCHA HOGEE TO RAM 'PRASAD' AURON TAK BHEE PAHUNCHEGA .
    KAISA HAI PRAYAG ?
    AANAND HEE HOGA .

    'MAA' PE NAYEE POST LIKHEE HAI .SIRSHAK CHOD KUCH NAHEEN AAYA . SHASTREE JEE KO LIKHA HAI,AAPBHEE JARA DEKH LEN .SAMASYA KYA HAI .

    FILHAL MUMBAI ME HOON AUR ' maa teree jai ho ' record karva raha hoon ( KAL HEE LIKHEE RAHMAN KO OSCAR MILNE KE BAAD AUR USEE KO SAMARPIT PAR BHARAT MAA KEE SHAN ME . ' MAA' POST PAR BHEE VAHEE GEET HAI JO CHAPNE KEE KOSHIS KAR RAHA HOON , ASFAL HONE PAR APNE BLOG MAN, HRIDAY...PE DALA HAI, CHAHE TO DEKH LEN ) 7 MIN. KA VIDEO HOGA .USE AAP PRAKASHIT HONE PE, (KUCH HEE DINON ME ) SHAYAD HAR MADHYAMON PE DEKHENGE. CHITRAPAT JAGAT SE BAHUT SAHYOG ,SAUJANYA MIL RAHA HAI .

    SAPREM -raj sinh .

    punasch:
    aapko pichlee bar new york se phon kiya tha par vah vaheen hai isliye fon bhee na kar paya . e-mail se no. bhee bhejen to baat bhee ho jaye . ' firdaus' ne meree likhee tippanee aur uska nagree lipyantaran dono nikal deen tippaniyon se lekin baad me visfot.com pe unkee aisee khabar lee ki ab bhash 'badal' gayee hai .

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  14. त्रिवेणी महोत्‍सव के बारे में जानकर प्रसन्नता हुई। इसके सकुशल सम्पन्न होने के पीछे आप जैसे समर्पित लोगों का ही हाथ है।

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  15. triveni mahotsaw ka varnan padhkar achha laga.upasthit na ho saka iska malal jarur hai lekin waha kya kuchh huwa yah jankar khusi bhi hai. vishnu ji ki kavita.....? lekin yadi iski vidio bhi hoti to phir kya kahne the. nam to achhe se padha nahi tha lekin kisi ne apne comment me triveni mahotsaw ke photographs blog pe dalne ke liye kaha hai. yadi aap apne agle post me aisa kuchh karte hain to mujhe bhi achha lagega. waise mujhe pura wishwas hai ki photographs aapne jarur li hogi,ab bas intjar hai unke blog pe aane ka.

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