आज लोहिया पार्क लखनऊ के हरे -भरे वातावरण में प्रातः काल के धुंधलके में पहुंच गया था। आसन बिछाकर ऑनलाइन योगकक्षा से जुड़ गया। कक्षा तो सात चक्रों के संतुलन संबंधी आसनों और उनके जागरण की मुद्राओं की थी। किंतु यहां की मनोरम छटा में कुछ नियमित आसन लगने का लोभ संवरण न कर सका। कुछ झलकियां आपके लिए।
भारत: एक लोकतांत्रिक देश ।
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“आओ बच्चों तुम्हें दिखाएँ झाँकी हिन्दुस्तान की,इस मिट्टी से तिलक करो, यह
धरती है बलिदान की।” यह गीत बचपन से हमें भारत से प्रेम करना सिखाता है। यह
हमारे देश...
1 दिन पहले














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