रुबाई
हर शाख हरी भरी महकते हैं फूल
जो साथ मिले तेरा चहकते हैं फूल लहरा जो गयी हवा तेरा आँचल सुर्ख पाकर के जवाँ अगन दहकते हैं फूल |
ग़ज़ल
आज ये हादसा हो गया
प्यार मेरा जुदा हो गया
बंदगी कर न पाया कभी
यार मेरा ख़ुदा हो गया
आप ने तो जिसे छू लिया
वो ही सोना खरा हो गया
सूखता जा रहा था शजर
तुमने देखा हरा हो गया
आदमी ख़्वाब में उड़ रहा
जागना बेमज़ा हो गया
भाइयों की जुदा ज़िन्दगी
दरमियाँ फासला हो गया
गोद में जिसने पाला कभी
आज वो भी ख़फा हो गया
उसकी उंगली पकड़ के चले
बस यही हौसला हो गया
जब सियासत में रक्खा क़दम
देखिये क्या से क्या हो गया
है सियासत बड़ी बेवफ़ा
दोस्त बैरी बड़ा हो गया
राजधानी में छायी किरन
केजरी क्या हवा हो गया
(सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी)
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भारत: एक लोकतांत्रिक देश ।
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“आओ बच्चों तुम्हें दिखाएँ झाँकी हिन्दुस्तान की,इस मिट्टी से तिलक करो, यह
धरती है बलिदान की।” यह गीत बचपन से हमें भारत से प्रेम करना सिखाता है। यह
हमारे देश...
1 दिन पहले

