पंडित सरस्वती पाण्डेय जी ने ही 1999 में मेरा विवाह संस्कार संपन्न कराया था। मैं आज अपने गांव में आया था तो 'ढेलर पंडी जी' अचानक अपने पुत्र के साथ आ गए। चर्चा के दौरान उन्होंने याद दिलाया कि मेरी बारात तीन दिन वाली थी। दूसरे दिन 'मरजाद' रहा। तीसरे दिन बारात विदा हुई थी। मरजाद के दिन जानवासे में "शिष्टाचार सभा" हुई थी। उस सभा में पंडी जी ने संस्कृत मंगलाचरण के बाद जो हिंदी में मंगल कामना सुनाई थी वह उन्हें 91 वर्ष की उम्र में आज भी याद थी। अनुरोध पर उन्होंने सहर्ष सुनाया।
मितव्ययता की कवायद
-
प्रधानमंत्री जी ने जनता (पढ़ें: टैक्स भरने वालों) से कहा है कि सोना कम
खरीदें, विदेश यात्राएँ टालें, ईंधन बचाएँ और मितव्ययिता अपनाएँ। हम तो 28
फरवरी को, जि...
4 दिन पहले


