माँ शाकुंभरी की कृपा ऐसी हुई कि
मुझ अकिंचन को सहारनपुर के इस विश्वविद्यालय में सेवा करने का आदेश मिला। एक नव
स्थापित विश्वविद्यालय के लिए बहुत कुछ पहली बार हो रहा था। मुझे उस सबका साक्षी
बनते हुए उसमें कुछ योगदान करने का भी अवसर मिला। देवी की कृपा से कुलगीत की रचना
हुई जिसके लिए महामहिम राज्यपाल से प्रशस्ति-पत्र और नकद पुरस्कार की प्राप्ति हुई। इस
सौभाग्य के क्षण का समाचार यहाँ से लगभग 1000 किलोमीटर दूर मेरे पैतृक गाँव जनपद
कुशीनगर में पहुँचने वाले अखबार में भी छप गया। अब मन बल्लियों उछल रहा है।
जिम में रामधुन, जन्माष्टमी प्रभाव
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सुप्रभात राम राम
भारत अद्भुत है और हम भारतीय भी आमतौर पर सुबह की सैर ही मुझे रुचती है, लेकिन
बीच-बीच में जिम में भी जाता हूं। जिम में ट्रेडमिल पर चलने...
1 दिन पहले



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