सत्यार्थमित्र

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सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी का ब्लॉग

रविवार, 14 जून 2026

शुभ-विदा सहारनपुर

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            प्रयागराज में कार्यभार ग्रहण करने के बाद वापस सहारनपुर आया था अपना बोरिया-बिस्तर बांधकर ले जाने के लिए। गृहस्थी का सामान ट्रक पर...
रविवार, 7 जून 2026

प्रयाग में नई पारी

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आज एक नई पारी प्रारंभ करने का दिन था। सहारनपुर से वापस होकर एक बार फिरसे प्रिय प्रयागराज में सेवा का अवसर मिला है। इस बार नैनी क्षेत्र में स...
रविवार, 31 मई 2026

विश्वविद्यालय परिसर का मोहपाश

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आज रविवार को माँ शाकुंभरी विश्वविद्यालय परिसर में सन्नाटा पसरा रहा। छुट्टी के दिन मैं अकेला ही था। अपने आवास में बिस्तर पर लेटा हुआ लखनऊ से ...
1 टिप्पणी:
सोमवार, 6 अप्रैल 2026

प्रयागराज अत्यंत प्रिय है मुझे

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पिछले दिनों एक व्यक्तिगत प्रयोजन से मुझे प्रयागराज जाना हुआ। इस शहर की तासीर मुझे एक जादुई मोहपाश में बांध लेती है। मुझे लगता है कि मैंने अप...
बुधवार, 25 मार्च 2026

साइकिल से सैर में शहद की मिठास

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प्रातःकालीन योगासन व प्राणायाम के ऑनलाइन सत्र के बाद साइकिल से सैर का मन हुआ। सहारनपुर का मौसम आजकल शानदार है। ठंड जा चुकी है और गर्मी अभी आ...
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सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी
Saharanpur UP, Uttar Pradesh, India
माँ-बाप के दिए संस्कारों के साथ इलाहाबाद विश्वविद्यालय से दर्शनशास्त्र में परास्नातक की शिक्षा पूरी होते-होते सरकारी नौकरी मिल गयी। ईश्वर की कृपा और बुजुर्गों के आशीर्वाद से जीवन में ‘कठिन संघर्ष’ जैसा कुछ महसूस नहीं हुआ। बस ईमानदारी और अनुशासन से अपना काम करते रहने की आदत से मन संतुष्ट रहता है। लेकिन कभी-कभी यह शेर हॉन्ट करता है - “जिन्दगी में ज़ौक क्या कारे-नुमाया कर गये बीए किया नौकर हुए पेंशन मिली और मर गये”
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