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Thursday, March 20, 2014

चुनाव आयोग का पीपली लाइव

Election2014भारतीय लोकतंत्र का सबसे बड़ा त्यौहार शुरू हो गया है। यह महीनों चलेगा। राजनीतिक पार्टियाँ कमर कस चुकी हैं, निर्दल भी किस्मत आजमाने का मन बना चुके हैं, पाला बदलने वाले न्यूज चैनेल्स पर छाये हुए हैं, भाषण बाजी में खंडन और मंडन की जोर आजमाइश चल रही है, टिकट के लिए घमासान मचा हुआ है, पैराशूट से प्रत्याशी उतर रहे हैं, उनका विरोध करने वाले कार्यकर्ताओं को समझाया जा रहा है। उपमा अलंकार में घोड़े, गधे से लेकर गिरगिट तक की मांग बढ़ गयी है। उधर प्रशासनिक तंत्र की कमान चुनाव आयोग ने संभाल लिया है। स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव संपन्न कराने की चुनौती को खूब गंभीरता से लिया गया है। चुनाव जीतने के लिए धनबल और बाहुबल के प्रयोग पर अंकुश लगाना सबसे बड़ी चुनौती है जिसे चुनाव आयोग ने शीर्ष प्राथमिकता दी है।

चुनावों की घोषणा होते ही आदर्श आचार संहिता लागू हो चुकी है और सरकारी तंत्र का ध्यान चुनाव संबंधी हरेक गतिविधि पर केंद्रित हो गया है। चप्पे-चप्पे पर आयोग की निगरानी टीमें वीडियो कैमरे के साथ तैनात कर दी गयी हैं। प्रत्याशी और उसके समर्थकों की एक-एक गतिविधि पर निगाह रखी जा रही है। आम जनता को भी जागरूक किया जा रहा है कि उन्हें कहीं से भी इस बात की भनक लगे कि मतदाताओं को लुभाने के लिए अवैध रूप से रुपया, शराब, साड़ी या अन्य गिफ़्ट आइटम किसी प्रत्याशी या उसके कार्यकर्ताओं द्वारा बाँटा जा रहा है तो तत्काल टोल-फ्री नंबर पर बतायें। हर जिले में 24X7 आधारित कॉल-सेन्टर खोले जा रहे हें। शिकातकर्ता की इच्छा पर उसकी पहचान गोपनीय रखते हुए प्राप्त शिकायत पर त्वरित कार्यवाही की जाएगी। पुलिस अधिकारी व मजिस्ट्रेट सहित उड़न-दस्ता तैयार है। खबर मिलते ही रवाना होने को तत्पर। रिस्पॉन्स टाइम की मॉनीटरिंग हो रही है।

elections-2014-400x250एक लोकसभा क्षेत्र में करीब डेढ़ दर्जन उड़न दस्ते घूमते रहेंगे। इसके अलावा इतनी ही स्थैतिक निगरानी टीमें (Static Surveillance Team) भी प्रमुख चौराहों और कस्बों में आने-जाने वालों की संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखेंगी। सभी जनसभाओं व रैलियों की वीडियो रिकॉर्डिंग इस प्रकार करायी जाएगी कि इसमें प्रयुक्त झंडा, बैनर, पोस्टर, बैरिकेडिंग, तोरणद्वार, शामियाना, कुर्सी, मेज, सोफा, मंच, माइक, स्पीकर, पर्दे, गाड़ियाँ, फूल-माला, मुकुट, तलवार, शाल-टोपी, चाय-कॉफी, लंच-नाश्ता आदि की संख्या गिनी जा सके और निर्धारित दर पर इनका खर्च जोड़कर प्रत्याशी के खाते में चढ़ाया जा सके। यहाँ तक की प्रत्याशी द्वारा किसी वैवाहिक प्रीतिभोज में जाकर यदि अपने लिए वोट मांगा जाएगा तो उस भोज का पूरा खर्चा जोड़कर उसके खाते में डाल दिया जाएगा।

निगरानी में लगी सभी टीमें वीडियो रिकार्डिंग करने के बाद उसकी सीडी बनाएंगी और ‘क्यू-शीट’ पर संक्षिप्त विवरण लिखकर सीडी केन्द्रीय नियन्त्रण कक्ष में जमा करेंगी जहाँ वीडियो देखकर विस्तृत विवरण तैयार करने वाली अलग टीम होगी। यह टीम खर्चे का हिसाब लगाकर लेखा टीम को बताएगी। ये सारे खर्चे एक ‘छाया प्रेक्षण पंजी’ (Shadow Observation Register-SOR) में दर्ज किये जाएंगे जिनका मिलान प्रत्याशी द्वारा प्रस्तुत खर्चे से किया जाएगा। यदि उसने कोई खर्चा छिपाया होगा तो उसे यहाँ से जोड़ दिया जाएगा। नोटिस अलग से दी जाएगी।

अखबारों के विज्ञापन और पेड-न्यूज को चिह्नित करके उसका खर्चा प्रत्याशी के खाते में जोड़ने के लिए अलग एक्सपर्ट लगाये गये हैं। इन सबकी मॉनीटरिंग के लिए चुनाव आयोग अलग से व्यय प्रेक्षक (Expenditure Observer) तैनात कर रहा है।

सभी प्रत्याशियों के लिए अनिवार्य कर दिया गया है कि वे चुनाव लड़ने के प्रयोजन से एक अलग बैंक खाता खोलें और अपने सभी खर्चे इसी खाते से चेक काटकर भुगतान करें। जो भी सहयोग राशि या चन्दा उन्हें प्राप्त हो उसे पहले इस खाते में जमा करना होगा तब खर्च करना होगा। नगदी लेन-देन की सीमा तय कर दी गयी है। किसी एक व्यक्ति या फर्म को उसके सामान या सेवाओं के बदले संपूर्ण अभियान के दौरान जोड़कर कुल बीस हजार से ज्यादा नगद भुगतान नहीं किया जा सकता। प्रत्याशी के प्रचार वाहन से यदि बड़ी मात्रा में नगदी या अन्य उपहार-भेंट आदि की सामग्री मिलती है तो उसे जब्त कर लिया जाएगा और उसके खर्चे में जोड़ भी लिया जाएगा। किसी सार्वजनिक भवन की दीवार पर यदि कोई चुनावी प्रचार लिखा मिला तो उसे आयोग के अधिकारियों द्वारा तत्काल मिटवा दिया जाएगा और उस प्रचार को लिखाने का खर्च व मिटाने का खर्च दोनो प्रत्याशी के खाते में जुड़ जाएगा। निर्वाचन व्यय प्रेक्षक की निगरानी में प्रत्याशी के चुनावी खर्च की मॉनीटरिंग (अनुवीक्षण) करने के लिए जो टीमें हैं उनसे कौन जाने आपकी भेंट कहीं हो ही जाय। इसलिए इनके नाम से परिचित हो लीजिए -

  1. व्यय प्रेक्षक (Expenditure Observer-EO)
  2. सहायक व्यय प्रेक्षक (Assistant Expenditure Observer-AEO)
  3. वीडियो निगरानी टीम (Video Surveillance Team-VST)
  4. वीडियो अवलोकन टीम (Video Viewing Team-VVT)
  5. लेखा टीम (Accounts Team-AT)
  6. शिकायत अनुवीक्षण नियन्त्रण कक्ष और कॉल सेन्टर (Complaint Monitoring Control Room & Call Centre)
  7. मीडिया प्रमाणन और अनुवीक्षण समिति (Media Certification and Monitoring Committee-MCMC)
  8. उड़न दस्ते (Flying Squads)
  9. स्थैतिक निगरानी टीम (Static Surveillance Team-SST)
  10. व्यय अनुवीक्षण प्रकोष्ठ (Expenditure Monitoring Cell-MNC)

Indian general election, 2014लोकसभा चुनाव से पहले उत्तर प्रदेश की विधान परिषद के लिए स्नातक निर्वाचन क्षेत्रों के चुनाव आगामी 23 तारीख को होने जा रहे हैं। इसमें मतदान प्रक्रिया की वेबकास्टिंग की जाने वाली है। चुनिन्दा पोलिंग बूथों को सीधे इंटरनेट पर सजीव प्रसारण के लिए लिंक कर दिया जाएगा। प्रयोग सफल रहा तो लोकसभा में भी इसे दुहराया जा सकता है।

इस संपूर्ण तंत्र को पूरे चुनाव अभियान की अवधि में सक्रिय रखने के लिए कितना व्यय सरकारी खजाने से होगा इसका हिसाब आप लगाइए। मैं इतना बता दूँ कि लोकसभा प्रत्याशियों को चुनाव लड़ने के लिए खर्च की सीमा जो चालीस लाख निर्धारित थी उसे इस बार बढ़ाकर सत्तर लाख कर दिया गया है।

उदासीन मतदाताओं को हर हाल में वोट डालने के लिए प्रेरित करने का जिम्मा भी चुनाव आयोग ने अपने ऊपर लिया है। इसके लिये चलाये गये अभियान को ‘स्वीप’ नाम दिया गया है। पिछले चुनावों में मतदान प्रतिशत में आयी उछाल इसी अभियान की परिणति है। स्वीप (Systematic Voter Education and Electoral Participation-SVEEP) के बारे में कुछ बातें अगली कड़ी में।

(सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी)
www.satyarthmitra.com

2 comments:

  1. पूरा अर्थतन्त्र गतिमान हो गया है।

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  2. भारत निर्वाचन आयोग का व्यय अनुवीक्षण तंत्र इतना भारी भरकम है कि मुझे लुप्त डायनासोरों की याद आ रही है।
    बहरहाल आप अपने जिले के इस व्यय अनुवीक्षण व्यवस्था के मुखिया होने के बावजूद भी आराम से ब्लागिंग कर रहे हैं ,
    मतलब आपका प्रबंध ये श्रेणी का है -कुछ गुर अपने अन्य जिलों के काउंटर पार्ट मित्रों से तो शेयर कर लें! स्वीप पर पोस्ट प्रतीक्षित है !

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