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Sunday, December 6, 2009

छः दिसम्बर का वार्षिक रुदन और मुकाबला बेशर्मी का...

 

अयोध्या का एक अर्थ ‘जहाँ युद्ध न हो’ पढ़ा था। लेकिन जब भी छः दिसम्बर की तारीख आती है मीडिया में तलवारें निकल आती हैं। उस त्रासद घटना का विश्लेषण करने के लिए बड़े-बड़े विद्वान, विचारक और राजनेता पत्रकारों द्वारा बुला लिए जाते हैं और टीवी पर पैनेल चर्चा शुरू हो जाती है। हर साल वही बातें दुहरायी जाती हैं। भाजपा, कांग्रेस, व समाजवादी पार्टी के नेता आते हैं और अपनी पार्टी लाइन के अनुसार बातें करके चले जाते हैं। कोई अपनी पाटी लाइन से टस से मस नहीं होना चाहता। उनके सभी तर्क एक दूसरे के लिए बेमानी हो जाते हैं।

लेकिन आश्चर्य होता है जब लोकतंत्र के चौथे स्तम्भ के रूप में अपनी पीठ ठोंकने वाले ‘ऐंकर’ भी एक खास विचारधारा के पोषण के लिए हमलावर हो उठते हैं। जिस प्रतिभागी की बातें इनसे मेल नहीं खाती उसको टोक-टोककर बोलने ही नहीं देते, केवल आरोपित करते जाते हैं लेकिन जो पार्टी लाइन इन्हे अपने अनुकूल लगती है उसके प्रतिनिधि को अपनी बात रखने के लिए प्रॉम्प्ट करते रहते हैं। यह सब इतनी निर्लज्जता और आक्रामक अन्दाज में होता है कि देखकर इस पत्रकार बिरादरी से भी अरुचि होने लगी है।

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छः दिसम्बर की पूर्व संध्या पर एन.डी.टी.वी. के कार्यक्रम ‘मुकाबला’ और ‘चक्रव्यूह’ में यही सब देखने को मिला। लोकप्रिय कार्यक्रम मुकाबला के ऐंकर दिबांग ने भाजपा प्रवक्ता प्रकाश जावड़ेकर से प्रश्न तो खूब किए लेकिन उनका उत्तर सुनने का धैर्य उनके पास नही था। वहीं समाजवादी पार्टी के मोहन सिंह को तफ़सील से यह बताने का अवसर दिया कि ‘भारत में भले ही हिन्दुओं की अक्सरियत है लेकिन यदि देश ‘डिस्टर्ब’ हुआ तो सबसे ज्यादा नुकसान हिन्दुओं का ही होगा। इसलिए हमें ऐसा कुछ भी नहीं करना चाहिए जिससे देश में मुसलमानों को तकलीफ़ हो और माहौल खराब हो जाय।’ यह भी कि बाबरी मस्जिद की साजिश घटित होने के बाद जो मुम्बई में और अन्य स्थानों पर आतंकी हमले हुए उसके दोषियों को सजा हो गयी। फाँसी और आजीवन कारावास मिल गया। लेकिन बाबरी मस्जिद के गुनाहगारों को आजतक सजा नहीं दी जा सकी। उनके इस कष्ट को दिबांग ने भी भरपूर समर्थन देते हुए सुर में सुर मिलाया।

कांग्रेस के प्रतिनिधि श्रीप्रकाश जायसवाल वीडियोलाइन पर थे। उनसे दिबांग ने कहा कि आप प्रकाश जावड़ेकर से पूछिए कि वे मस्जिद गिराये जाने के गुनहगार हैं कि नहीं। इसपर जायसवाल को प्रश्न नहीं सूझा। बोले- हम क्या पूछें, दुनिया जानती है इनकी करतूतें। प्रकाश जावड़ेकर ने कहा- मेरे पास प्रश्न हैं उसका उत्तर आप लोग दीजिए... ६ दिसम्बर १९९२ क्या अचानक चला आया था? १९४८ में रामलला की मूर्तियों की स्थापना किसने करायी...१९८६ में जो ताला खोला गया था वह मन्दिर का था कि मस्जिद का, ...१९८९ में शिलान्यास मन्दिर का हुआ था कि मस्जिद का ...इन सारे कार्यों के समय किसकी सरकार थी?  प्रश्न और भी रहे होंगे लेकिन दिबांग ने हाथ उठाकर उन्हें बिल्कुल चुप करा दिया और किसी प्रतिभागी से उन सवालों का जवाब देने को भी नहीं कहा।

बात उस ‘साजिश’ पर होने लगी जो ‘संघियों ने मस्जिद को गिराने के लिए’ रची थी। कांग्रेस, सपा और दिबांग चिल्ला चिल्लाकर इसे एक साजिश करार दे रहे थे । कल्याण ने शपथपत्र देकर आश्वस्त किया था कि मस्जिद सुरक्षित रहेगी, लेकिन उन्होंने साजिश रचकर मस्जिद ढहा दी। पूरा ‘संघ परिवार’ इस झूठ-फरेब की साजिश में शामिल था। श्रीप्रकाश जायसवाल ने कहा कि मुख्यमन्त्री के शपथपत्र पर यकीन करना हमारा कर्तव्य था। भाजपा इसे लाखों श्रद्धालुओं की स्वतःस्फूर्त भावना का प्रस्फुटन बता रही थी। उमा भारती भी वीडियोलाइन पर अवतरित हुईं और साजिश की थियरी को सिरे से नकारते हुए बोलीं कि गान्धी जी कहते थे कि पाकिस्तान मेरी लाश पर बनेगा। लेकिन वे जिन्दा रहे और पाकिस्तान बन गया। इसका मतलब यह तो नहीं कि वे पाकिस्तान बनाने की साजिश कर रहे थे।

पैनेल में एक पूर्व केबिनेट सचिव सुब्रमण्यम साहब भी थे। लिब्रहान आयोग की रिपोर्ट को उन्होंने लगभग कूड़ा ही बता डाला। बल्कि जाँच आयोग अधिनियम में संशोधन करके केवल कार्यरत न्यायाधीशों का ही आयोग गठित करने का सुझाव दे दिया। उनका आशय शायद यह था कि सेवा निवृत्त न्यायाधीश समय और सुविधा बढ़वाने के जुगाड़ में ही उलझे रह जाते हैं। काम की रफ़्तार धीमी और त्वरित न्याय की आशा क्षीण हो जाती है। समस्या की जड़ में उन्होंने राजनीति को ही माना। यदि राजनीति इससे किनारे होती तो समाधान निकल सकता था।

उधर चक्रव्यूह में कल्याण सिंह घेरे जा रहे थे। ऐंकर ने पूछा- आपको छः दिसम्बर की उस दुर्घटना पर कोई अफ़सोस है? कोई शर्म नहीं... कोई पश्चाताप नहीं... कोई दुःख नहीं... बल्कि हमें इस दिन पर गर्व है। ...मैने शपथपत्र दिया था कि ढाँचे की रक्षा करेंगे, पूरा इन्तजाम भी कर रखा था, लेकिन मैंने कारसेवकों पर गोली चलाने का आदेश नहीं दिया। मुझे इसपर कोई खेद नहीं है। मैं रक्षा नहीं कर सका इसलिए तत्काल इस्तीफा दे दिया। ...मैं और क्या कर सकता था?  प्रश्नकर्ता ने कहा आपने दो चार सौ लोगों की जान बचाने के लिए करोड़ों हिन्दुओं और मुसलमानों के बीच बँटवारा हो जाने दिया। गोली चल जाती तो अधिक से अधिक कुछ सौ जानें ही जातीं लेकिन आपने मस्जिद ढहाकर करोड़ों नागरिकों में कटुता फैला दी... घेरा बन्दी और तेज हुई तो कल्याण बस ‘बहुत धन्यवाद’ ‘बहुत धन्यवाद‘ ’बहुत धन्यवाद’ की रट लगाने को मजबूर गये। बेशर्मी मूर्तिमान थी... शायद दोनो ओर।

सोचता हूँ यह वार्षिक रुदन और प्रलाप तो अब रूटीन हो गया है। जिन्दगी उससे काफी आगे निकल चुकी है। पिछले साल इस दिन मैं बड़ा दुःखी हो गया था। मुम्बई हमले के बाद के माहौल में जब अयोध्या काण्ड की बरसी पड़ी तो उसी तारीख को पड़ने वाले अपने बेटे के जन्मदिन पर उत्सव मनाने का मन ही नहीं हुआ। लेकिन अब सोच रहा हूँ कि अपनी छोटी-छोटी खुशियों को इस राजनिति के गन्दे खेल को देखकर कुर्बान करना ठीक नहीं है। इसलिए मैंने आज बेटे को पूरा समय देने का मन बनाया है।

साँई मन्दिर के बाहर

सुबह-सुबह साँईं मन्दिर हो आये हैं। शाम को केक भी कटेगा और बच्चा पार्टी दावत भी उड़ाएगी।

सत्यार्थ (तीन वर्ष)

सत्यार्थ के ब्लॉग पर जन्मदिन की सूचना ब्लॉगजगत को दी जा चुकी है। आप सबका स्नेह और आशीर्वाद उसे मिलने भी लगा है। मैं भी बोलता हूँ “हैप्पी बड्डे”

 (सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी)

22 comments:

  1. जन्मदिन की बधाई भतीजे!
    हमरी मिठाई कहाँ है?
    नामी होगे - बहुत शुभ दिन जन्मे हो।
    आशीर्वाद।

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  2. ये जो पालक दिख रही है, आज पालक पनीर उसी की बनेगी क्या ?

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  3. बालक को जन्मदिन की शुभकामनायें और आशीर्वाद!

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  4. bete ko janamdin ki hardik badhayi

    satya se moonh to nhi mod sakte na.......dil ki faans hai ye, kahin na kahin chubhti hi rahegi.isi par abhi kuch panktiyan likhi hain pls padhiyega.
    http://redrose-vandana.blogspot.com

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  5. सच लिखा है ........
    बालक को जानम दिन की बहुत बहुत बधाई .........

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  6. सत्यार्थ को बहुत बहुत आशीष !
    आप सभी को मेरी शुभकामनायें !

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  7. वाह, बालक तो बहुत बड़ा हो गया। जन्मदिन की बहुत बधाई!!!
    बाकी टेलीविजन वाले को क्या कहें - स्टूडियो उनका, माइक उनका; जो कहेंगे वो ही कहेंगे!

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  8. अरे सुंदर सुंदर स्वेटर वाले तेरे को जन्मदिन की बहुत बधाई!!! आज तो बहुत प्यारा दिख रहा है,

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  9. अभी दुबारा देखा तो लगा कि सब फोटो बहुत अच्छे /प्यारे हैं सो कहने का मन किया। फोटोग्राफ़र लेकिन गायब है।

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  10. सत्यार्थ को जानम दिन की बहुत बहुत बधाई ........

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  11. सुंदर स्वेटर वाले सत्यार्थ को जन्मदिन की बहुत बधाई..........आप सभी को मेरी शुभकामनायें

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  12. mujhe bhateeje k janm kee tareekh hamesha yaad rahegi. bahut-bahut mubaarak bad dil se!

    saajha-sarokaar ki nayi post padhen.

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  13. बेटे के जन्मदिन पर बेटे को बहुत बहुत आशीष। आप के परिवार को बहुत बहुत शुभकामनाएँ।

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  14. सभी ढांचे के गिरने पर बात कर रहे हैं, कोई उसकी बुनियाद [जड़] तक नहीं जा रहा है कि सोलवीं सदी के पहले वहां क्या था?

    हैप्पी बर्थडे विद पप्पी टू सिद्धार्थ :)

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  15. Sateek Aakalan kiya hai Sid
    Bete ke janam din ki meri taraf se bhi badhai sweekar karein
    Meri bitiya bhi is 6th December ko 3 baras ki ho gayi. Maine to poorey man se manaya uska janamdin. Uska naam bhi Shaurya diwas ke din hone ke kaaran SHOURYAA rakaha hai

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  16. भाँजे को जनमदिन की अनन्त शुभकामनायें

    यही सही तरीका है। रुदन जयंती जाये भाड़ में.. देश की अगली पीढ़ी की खुशियाँ ज्यादे तवज्जो के लायक हैं.. कामना है कि ६ दिसम्बर कलुषित सेकुलरिज्म की पुण्यतिथि के बजाय सत्यार्थ जयंती के नाम से प्रसिद्ध हो।

    @ गुरुदेव गिरिजेश जी

    हमें तो ई पुदीना लगे है। अच्छा है! दावत के बाद का भी इंतजाम है।

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  17. Sabse pahle to balak ko (vilamb se hi sahi)bahut bahut aashirwaad...

    Aapne bahut hi sarthak likha hai is vishay par....mujhe lagta hai,rajnetaon aur midiya ko chhod shayad hi aam janta ki koi dilchaspi bachi hai babri vidhwans me...Vaimanasyta ke prasaar ko 6 dec. ko swarthi log hi jilaye hue hain...

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  18. der se hee sahi Janm din kee badhaai! priy satyarth ko meri or se bhi.

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  19. अरे आज ही पता चला, बहुत देर कर गये, अन्‍यथा शौर्य दिवस मनाते या न मानते जन्‍मदिवस तो जरूर मनाते :)

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  20. प्रिय सिद्धार्थ जी ,
    आपके आलेखों पर तो आना होता ही रहता है .हाँ लेखन पर टिपियाना नहीं हो पाता आजकल . बड़े जंजाल पाल रखे हैं .सिद्धार्थ के जन्म दिन की यह पोस्ट मोबाईल पर पढी थी और उसी दिन सोचा लौट कर लिखूंगा .पर रह गया .खैर चित्र देख मन पुलकित हुआ और मन में जो बलवती इक्क्सा है मिल कर देखने की कब पूरी होती है ,उसका इंतज़ार है . देर से ही सही मेरे आशीष उसके लिए .
    लेकिन उसी पोस्ट पर आपने बड़ा गंभीर मुद्दा उठाया है .उस पर कहना तो बहुत कुछ था पर अब शायद देर हो चुकी है . फिर भी इतना ही कहूँगा ,आपके लिखे से सम्पूर्ण सहमत भी और जोडूंगा की हर तरह का मीडिया बिका हुआ ,प्रायोजित और सोची समझी साजिश की तहत पूर्व नियोजित है , और साथ ही इसी दिशा में कुत्सित उद्देशों की पूर्ती भर कर रहा है .सजग लोगों को कुछ करना ही होगा .
    सप्रेम
    राज

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