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Sunday, April 12, 2009

चुनावी कुण्डलियाँ... वाह नेता जी!

 

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आजकल चुनावी सरगर्मी में कोई दूसरा विषय अपनी ओर ध्यान नहीं खींच पा रहा है। दिनभर दफ़्तर से लेकर घर तक और अखबार-टीवी से लेकर इण्टरनेट तक बस चुनावी तमाशे की ही चर्चा है। सरकारी महकमें तो बुरी तरह चुनावगामी हो गये हैं।

ऐसे में मेरा मन भी चुनावी कविता में हाथ आजमाने का लोभ संवरण नहीं कर सका। तो लीजिए पेश हैं:

चुनावी कुण्डलियाँ

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वामपन्थ की रार से अलग पड़ गया ‘हाथ’।
सत्ता की खिचड़ी पकी, अमर मुलायम साथ॥

अमर मुलायम साथ चले कुछ मास निभाए।
बजा चुनावी बिगुल, छिटक कर बाहर आए॥

यू.पी. और बिहार में, नहीं ‘हाथ’ का काम।
तीन-चार मोर्चे बने, ढुल-मुल दक्षिण-वाम॥

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अडवाणी की मांग पर, मनमोहन हैं मौन।
सत्ताधारी पीठ का,     असली  नेता कौन॥

असली नेता कौन समझ में अभी न आया।
अडवानी,  पसवान,  मुलायम,  लालू,  माया॥

लोकतंत्र का मन्त्र,  जप रही बर्बर वाणी।
‘पी.एम. इन वेटिंग’ ही  बन बैठे अडवाणी॥

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नेता पहुँचे क्षेत्र में, भाग-भाग हलकान।
वोटर से विनती करें, हमें चुने श्रीमान्‌॥

हमें चुनें श्रीमान्,    करूँ वोटर की पूजा।
मैं बस एक महान, नहीं है काबिल दूजा॥

मचा   चुनावी शोर,  घोर घबराहट देता।‌
पाँच वर्ष के बाद    लौटकर आया नेता॥

आप चुनाव का भरपूर आनन्द लीजिए। लेकिन एक विनती है कि मतदान के दिन धूप, गर्मी, और शारीरिक कष्ट की परवाह किए बिना अपना वोट ई.वी.एम. मशीन में लॉक कराने जरूर जाइए। यदि हम इस महत्व पूर्ण अवसर पर अपने मताधिकार का सकारात्मक प्रयोग नहीं करते हैं तो राजनीतिक बहसों में हिस्सा लेने का हमें कोई हक नहीं है।

(सिद्धार्थ)

18 comments:

  1. सत्य वचन त्रिपाठी जी॥

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  2. सत्य वचन त्रिपाठी जी॥

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  3. सटीक चुनावी कुण्डलियाँ . वाह वाह सिद्धार्थ जी . बधाई हो .

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  4. तुम्हारा होली वाला पोस्ट पढा. बहुत पसंद आया. मेरे गांव की होली तो करीब मर ही चुकी है.

    एक अनुरोध है होली में गाए जाने वाले शिष्ट फाग का एक संकलन अपने ब्लाग में अपलोड कर सको तो भोजपूरी क्षेत्र के जो लोग बाहर हैं वे इनका आनन्द ले पाएंगें. कुछ मुझे याद आ रहे हैं:

    ' मोरी छोडि द गगरिया हो स्याम कहें ब्रजना~~री~~~!'

    'जब से हो लटकन गिरि गयो नींद नहिंं आयो~~~'

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  5. वाह...मज़ा आ गया। कुंडली पर आपकी पकड़ खूब है। यह हमारा भी प्रिय छंद है।

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  6. आगे आगे देखें, कुण्डलियां किस करवट बैठती हैं। महीने सवा महीने की देर है।

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  7. वामपन्थ की रार से अलग पड़ गया ‘हाथ’।
    सत्ता की खिचड़ी पकी, अमर मुलायम साथ॥

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  8. जोरदार लिखा है -आपकी काव्य प्रतिभा का लोहा मान गए !

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  9. 5 warsh bad lautkar aaya neta. sahi kha aapne, jitne ke bad to in logon ke darshan bhi durlabh ho jate hain. chunawi mahaul par aise hi najar banaye rakhiye aur dhaka dhak nayi nayi poste dete jaiye....

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  10. SIDDHARTH JEE AAPKA YEH RANG DEKH DANG HOON .VYANG AUR GEHRAYEE SATH SATH .BEDHADAK BHEE BEDHAK BHEE . KUNDALIYON KEE MARAK SHAKTI KA SUNDAR PRAYOG .

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  11. मान गये आपकी इस व्‍यंग विधा को, आपकी चर्चा महाशक्ति ब्‍लाग पर हुई है। आप सादर आमंत्रित है।

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  12. वाह ! मजबूत पकड़.... सही नजर !

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  13. बेहतरीन प्रस्तुती.....व्यंग्य और गहनता का उचित सम्मिश्रण किया गया है... आभार

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  14. बहुत खूब.

    कुण्डलियाँ भी उनके ऊपर जो कुंडली मारे....बहुत बढ़िया.

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  15. आप तो लग रहा है पूरा नेताजी लोगों की कुंडलिये बांच देंगे.

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  16. @मतदान के दिन धूप, गर्मी, और शारीरिक कष्ट की परवाह किए बिना अपना वोट ई.वी.एम. मशीन में लॉक कराने जरूर जाइए। यदि हम इस महत्व पूर्ण अवसर पर अपने मताधिकार का सकारात्मक प्रयोग नहीं करते हैं तो राजनीतिक बहसों में हिस्सा लेने का हमें कोई हक नहीं है। वोट दें मगर किसको? उनको जिनके पास पहले से करोड़ो की सम्पत्ति है मगर जनता के लिये नहीं, वोट खरीदने के लिये; या उन्हें जिनके पास खुद के नाम से तो नहीं उनकी पत्नी के नाम से कुछ जमीनें और दो- चार मकान हैं या उन्हें, जो बताते हैं कि मेरे ऊपर बैंक का चार लाख रुपया कर्ज है? इनमें से कौन जनता के हित मे काम करेगा? विश्वास करें तो किस पर?

    हमारे नेता जी जिनके पास अचल सम्पत्ति भरी पड़ी है, अपना देश भूखा है, लेकिन विदेशों में अनुदान दे रहे हैं। बाकी का धन स्विस बैंक की शोभा बढ़ा रहा है।

    ये नेताजी बेचारे अभी अपने नाम से तो ना ही जमीन ले पाये और न ही मकान। जो कुछ है उनकी धर्मपत्नी का है। मेरे बिचार से एक मौका इन्हें भी मिलना चाहिये ताकी कुछ तो अपने नाम भी कर सके। उसके बाद तो इनकी प्यारी जनता है ही। इनको समय- समय पर चन्दा देती रहेगी- जन्मदिन और शादी की सालगिरह मनाने के वास्ते।

    बेचारे नेता जी… मेरा निवेदन है कि आप इन्हें वोट दें इनकी जेब अभी खाली है। बैंक के कर्ज में डूबे पड़े हैं। भाइयों और बहनों आप इन्हें भी एक मौका दे। ताकि इनकी भी स्थिति में कुछ सुधार आए। बेचारे नेता जी कर्जा पटा लें और बीबी-बच्चों के नाम कुछ जमीन जायदाद कर लें, तो बताइये ना वोटवा दैंगे न हमारे बेचारे नेता जी को….

    एक हैं कुवांरे नेता जी, इनको महलों का बिस्तर रास नहीं आता। आज कल जनसेवा में लगे हैं, ना जाने कहाँ खोये रहते हैं। इनके उपर भी तरस खाइए… अब देखिये ना, जब इन्हें नींद नही आती तो वोट मांगने गरीबों की झोपड़ी में निकल पड़ते हैं। अगले दिन अखबार में समाचार बन गया कुँवारे नेता जी एक गरीब के घर नमक रोटी खाये और वहीं सोने को ठान लिये। बेचारी के पास खुद को ओढने के लिये रजाई तो थी नहीं, कहीं और से मांग कर ले आयी।

    अब आप ही बतलाइये, जिन्हें महलों की मखमली रजाई में नींद नही आयी उन्हें उस गरीब की बास मारती रजाई में भला कैसे नींद आयेगी? बेचारे पर रहम कर दीजिए। देश के राजकुमार को चैन की नींद तो बख्श दीजिए।

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  17. बहुत सुंदर लिखा है आपनें ,बधाई .

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  18. acchi kahi aapane,badhai. chunao me agar ham apani bhagedari vote ke madhyam se sunishit nahi karte to rajaniti me sudhar ki sampurna kasarat bekar hai.so please vote jaroor kare.

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