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Sunday, January 4, 2009

तिल ने जो दर्द दिया...!

 

यूँ तो प्लास्टिक सर्जरी के क्षेत्र में आयी प्रगति ने लोगों को सुन्दर और सुडौल दिखने की चाहत को काफी हद तक पूरा करने का इन्तजाम जुटा दिया है, लेकिन यदि गोरे-चिट्टे चेहरे पर प्रकृति का दिया हुआ काला तिल हो तो सुन्दरता कुछ अलग ही रूप धारण कर लेती है। कितने शायरों, कवियों और फिल्मी गीतकारों ने इस तिल की महिमा पर कलम तोड़ कर लिखा है। ऐसे में यदि यही तिल किसी को छेड़-छाड़ और हँसी ठिठोली का लक्ष्यपात्र बना दे और इससे भी आगे बढ़कर जीविका पर संकट खड़ा कर दे तो क्या होगा…?

यहाँ के एक नामी अस्पताल की एक नर्स के लिए गोरी सफेद ठोड़ी पर चमकता काला तिल तो जैसे साक्षात्‌ आफत्‌ का निमन्त्रण पत्र बन गया। मुझे यह कहानी फ्लैश बैक में तब सुनने को मिली जब वे अस्पताल में मातृका (matron) के पद से सेवानिवृत्त होने के बाद पेंशन पाने के लिए मेरे समक्ष अपनी पहचान कराने के लिए उपस्थित हुईं। हुआ यूँ कि इनकी पेंशन के लिए जो कागजात विभाग द्वारा भेजे गये थे उसमें वैयक्तिक पहचान के चिह्न (mark of personal identification) के रूप में ‘ठुड्डी पर छोटा काला तिल-a small black mole on chin’ अंकित था। लेकिन मौके पर जब मैने यह तिल दिखाने को कहा तो उन्होंने ठुड्डी पर सायास रखे हाथ को थोड़े संकोच के साथ हटाया।

मुझे हैरत तो तब हुई जब वहाँ कोई तिल दिखा ही नहीं। थोड़े असमंजस के साथ मैने  पेंशन प्रपत्र पर इस आशय की ‘आपत्ति’ अंकित कर दी कि पहचान चिह्न नही पाया गया। अब तो बड़ी मुश्किल हो गयी। खूबसूरत चेहरे पर हवाइयाँ उड़ने लगीं। साथ में आये उनके पति ने स्थिति सम्हालने की कोशिश की। बोले - मुझे कागज दीजिए, मैं एक घण्टे में इसमें सुधार कराकर हाथोंहाथ ले आता हूँ। इन्हें सभी जानते हैं। मैने व्यक्तिगत जोखिम पर उन्हें वह पन्ना निकालकर दे दिया जिसपर निशान लिखा हुआ था।

लेकिन दो दिन बाद हताश और निराश नर्स अकेले ही आयीं। अपने निष्फल प्रयास की कहानी कहते-कहते आर्त हो उठीं। उन्होंने दुखी होकर यह तक कह दिया कि कागज में संशोधन नहीं हो पा रहा है, यदि आप अनुमति दें तो प्लास्टिक सर्जरी से एक तिल ही बनवा लाऊँ। मुझे सहसा उस मुगलकालीन सिपाही की कहानी याद आ गयी जिसके दुर्व्यवहार से दुखी सरकारी मुन्शी ने बदले की नीयत से वेतन भुगतान के लिए उसकी पहचान गलत लिखकर उसके आगे के चार दाँत तुड़वाने को मजबूर कर दिया था।

चूँकि आपत्ति दर्ज की जा चुकी थी इसलिए नया तिल बनवाने का विकल्प मुझे ही झूठा साबित कर देता। मैने मना कर दिया। लेकिन मैने उन्हें पेंशन भुगतान करने का ढाँढस बधाया और सरकारी कायदे के अनुसार सम्बन्धित विभाग को पत्र लिखकर पहचान चिह्न में नियमानुसार संशोधन करने का अनुरोध सक्षम अधिकारी को विशेष वाहक के माध्यम से प्रेषित कर दिया।

एक दो दिन बाद उसी अस्पताल के ‘वार्डब्वॉय’ पद से सेवानिवृत्त एक अन्य कर्मचारी अपनी पेंशन के लिए आए तो बिना पूछे ही उनके तिल की कहानी बताने लगे। दर‍असल इस नर्स के चर्चित और ‘विलुप्त’ तिल की कहानी अगले ही दिन अस्पताल में फैल गयी थी। उस व्यक्ति ने बताया कि यह नर्स जब नौकरी में आयी तो बला की खूबसूरत थी और अपने कार्य में भी इतनी दक्ष थी कि सभी डॉक्टर इसे अपने साथ रखना चाहते थे। इ्नका स्नेहिल स्पर्श पाकर मरीज जल्दी ठीक हो जाते थे। लेकिन जमाने की रीत ने इस महिला को कष्ट भी दिए। ‘गोरे-गोरे मुखड़े पे काला-काला तिल’ की तर्ज पर छे्ड़-छाड़ पहले तो ठीक लगी होगी लेकिन उम्र बढ़ने के साथ साथ जब इसकी अति होने लगी तो इन्होंने प्लास्टिक सर्जरी से इसे स्वयं हटवा दिया।

अब विडम्बना देखिए कि इस तिल ने पहले तो चेहरे पर अड्डा जमाकर कष्ट दिया, और जब उम्र का तीसरा पड़ाव आया तो उसके चले जाने से संकट खड़ा हो गया।

इस विचित्र संयोग से रूब़रू होने के बाद मुझे तिल के विषय में कुछ और जानने की इच्छा हुई। अन्तर्जाल में टहलते हुई मुझे कुछ बेहद रोचक जानकारी मिली है। मनोवैज्ञानिकों ने तिल सम्बन्धी जानकारी को तिलशास्त्र (moleosophy) के रूप में एक अलग विषय की पहचान दी है।

सबसे पहले मैंने पढ़ा कि ठुड्डी पर बाएं या दाएं तिल वाले व्यक्ति के बारे में ऐसी मान्यता है कि वे बेहद कोमल स्वभाव के, स्नेह और वात्सल्य की भावना से ओतप्रोत, दूसरों की सेवा का ध्यान रखने वाले होते हैं। किसी भी परिस्थिति के साथ ताल-मेल बिठाने में सक्षम ये लोग कानून का सम्मान करने वाले समर्पित व निष्ठावान कर्मचारी होते हैं और इन्हें यात्रा करने का शौक भी होता है।

इस विवरण को पढ़ने और उस मातृका (matron) के बारे में जानने के बाद मुझे तिलशास्त्र में रुचि हो गयी। कुछ जानकारी आपके लिए इकठ्ठा कर लाया हूँ। फुर्सत में अपनी सुविधा के अनुसार पढ़िए।

 

तिल का आकार व्यक्तित्व का प्रकार
गोल (Round) अच्छा, आकर्षक
लम्बोतरा (Oblong) उपयुक्त धनागम
कोणयुक्त (Angular) अच्छा-बुरा दोनो रंग
तिल का रंग जीवन का ढंग
हल्का, भूरा भाग्यशाली, कम प्रयास में सुखी
गाढ़ा, काला इच्छापुर्ति में अवरोधों का सामना

शरीर के अलग-अलह हिस्सों में तिल की उपस्थिति अलग-अलग संकेत देती है। आप इसे देखें जरूर लेकिन इसपर विश्वास अपनी सुविधाके अनुसार ही करें। मैने इसकी सच्चाई का कोई दावा नहीं किया है। smile_omg

कहाँ है तिल (अंग) कैसा होगा व्यक्तित्व
गाल गम्भीर व अध्ययन शील, विलासिता से अनाकर्षित
कान भाग्यशाली
दाहिनी भौंह अत्यन्त सक्रिय व सभी उद्यमों में सफल
आँख का बाहरी कोना ईमानदार, विश्वसनीय व स्पष्टवादी
ललाट

वैभवपूर्ण, समृद्ध, तथा तृप्त

होंठ महत्वाकंक्षी, जीवन में आगे बढ़ते जाने की ललक
नाक सच्चा व निष्कपट मित्र, परिश्रमी
ठुड्डी (दाएं या बाएं) कोमल व वात्सल्यपूर्ण प्रकृति, कर्मठ व जिम्मेदार
काँख (armpits) बायीं- प्रारम्भिक संघर्ष के बाद अच्छी सफलता
दायीं- सुरक्षा सम्बन्धी खतरे, सतर्कता जरूरी
गर्दन सामने- अप्रत्याशित सौभाग्य
दाएं-बाएं- बेतुका स्वभाव
पीछे- सादगी पसन्द
छाती बायीं- आलसी प्रवृत्ति से पारिवारिक जीवन दुष्प्रभावित
दाहिनी- सक्रिय व ऊर्जावान, जीवन में सन्तुष्टि
निप्पल पुरुष- चंचल चित्त, अधीर प्रकृति
महिला- सामाजिक प्रत्तिष्ठा हेतु प्रयत्नशील
नाभि पुरुष- भाग्यशाली, महिला- अधिक बच्चों की कामना
बाँह विनम्र, परिश्रमी, सुखी वैवाहिक जीवन
कोहनी के निकट पुरुष- संघर्षपूर्ण जीवन, सम्भावित वैधुर्य
महिला- नौकरी में परेशानी, पे्शागत कष्ट
कोहनी साहसी, उत्साही, जोखिम उठाने को तैयार, यात्रा के शौकीन
कलाई मितव्ययी, कार्यदक्ष, निपुण, भरोसेमन्द
हाथ प्रतिभाशाली, जीवन में सफल
अंगुली ईमानदारी में विश्वास कम, अतिरंजना में अधिक
पीठ अविश्वसनीय (इनपर दाँव लगाने से पहले पूरी जानकारी कर लें)
नितम्ब सन्तुष्ट, व्यावहारिक, ऊर्जावान, लचीला, समझौतावादी
घुटना दाहिना- मित्रवत्‌, सहयोगी प्रवृत्ति
बायाँ- खर्चीली जीवनशैली
पाँव आरामतलब, आलसी (स्वस्थ रहने के लिए व्यायाम अनिवार्य)
एंड़ी दोस्त कम दुश्मन ज्यादा बनाने की फितरत

नोट: मैं सेवानिवृत्त नर्स की प्रतीक्षा कर रहा हूँ ताकि उन्हें धन्यवाद देते हुए फौरन पेन्शन शुरू कर सकूँ।

14 comments:

  1. तिल के बारे में जानकारीपूर्ण पोस्ट के लिए धन्यवाद.

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  2. वार्ता रोचक रही. निष्कर्ष यह निकला कि पहचान के चिन्हों को और वैज्ञानिक होने की ज़रूरत है.

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  3. अपने यहाँ भी तिल, तिला और तिल के तेल पर कई अप्रकाशित किंतु लोक जीवन में बहुश्रुत आनूभूतिक ज्ञान चर्चित हुए हैं -इलाहाबाद आकर कभी तफसील से बता दूंगा सिद्धार्थ जी -इस गुप्त ज्ञान को यहाँ प्रकाशित करने की हिम्मत नहीं है .परापने सामग्री जोरदार जुटाई हैं -आपको विज्ञान का सेवी होना था !

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  4. बहुत सुंदर लगा आप का लेख ओर तिल पर लिखा पढ कर अब बेचारी उस नर्स को भी खुस कर दो दे दो उस बेचारी की पेंशन, यक कम्बख्त तिल ना जवानी मै चेन से रहने देता है, ओर ना हि बुढापे मै.
    राम राम जी की

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  5. तिल चर्चा अच्छी लगी। नर्स के तिल बनवा के उसका काम कर दिया जाये भाई!

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  6. पुरुष कहता है कि दौलते हुस्‍न पर दरबान बिठा रखा है लेकिन जब दरबान ही मुसीबत बन गया तो बेचारी क्‍या करती? सज्‍जन थी इसलिए उसने सोचा कि न तिल होगा न ताड़ बनेगा। लेकिन आपने नेक काम किया कि उसके पेंशन के कागजात तैयार करा दिए वरना कोषाध्‍यक्ष तो इसमें भी अच्‍छी खासी सुविधा शुल्‍क का इंतजाम कर लेते।..... तिल के विषय में आपकी जानकारी रोचक है। बस! एक ही आग्रह है कि मिश्रा जी जब कभी इलाहबाद आकर आपको कान में तिल के विषय में बताएं तो उसे सार्वजनिक मत कीजिएगा!

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  7. इस तिल ने तो गजब कर दिया !
    खैर ये बताइए की अगर सर्जरी करा दी जाए तो तिल का प्रभाव समाप्त हो जायेगा क्या? तो फिर अंगूठी बनवाने और पूजा पाठ कराने की जगह ज्योतिष सर्जरी की भी सलाह देने लगेंगे किसी डॉक्टर के रेफेरेंस के साथ :-)

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  8. रोचक वाकया है सुबह पहले इसको पेपर में पढ़ा था ..अब यहाँ तो और भी नई जानकारी मिल गई :) शुक्रिया

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  9. तिल के बारे में जानकारीपूर्ण पोस्ट के लिए धन्यवाद!!!

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  10. इसे ही कहते हैं तिल का ताड़ बनना।

    आप के माध्यम से समाज से तिरस्कृत, मुख्यधारा व परिवार में बोझ से माने जाने वाले बुजुर्गों का कुछ सध जाए तो जाने कितनी असीसें देंगे। वरना राजशाही में उन्हें चक्कर पर चक्कर लगवा कर धकियाने वालों की कमी नहीं।

    आपकी संवेदनशीलता उनका कुछ कल्याण कर जाए व यथावत् बनी रहे, यही कामना है। यह पुण्य कमा ही लीजिए अब।

    अब यहाँ एक रोचक स्वानुभूत यथार्थ तो नहीं बाँचा जा सकता, पर इतना बता दूँ कि इस पोस्ट ने हमें खूब हँसाया।

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  11. अहा । एकदम रोचक । अलग ही विषय उठाया आपने। काफी मेहनत की गई है विषय सामग्री जुटाने में।

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  12. Good ......hahahahahahahah.....
    mai samagh sakata hoo aap ki mano...
    aap ko ahasas hoga as a police officer i face this type of different til..... regularly...
    khair accha laga.....
    waiting new blog.....
    take care....

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