हमारी कोशिश है एक ऐसी दुनिया में रचने बसने की जहाँ सत्य सबका साझा हो; और सभी इसकी अभिव्यक्ति में मित्रवत होकर सकारात्मक संसार की रचना करें।

Friday, October 10, 2008

छुट्टी की छटा…!! :))

दुर्गा-पूजा शुरू हुई तो हो ली छुट्टी।
बेटी विद्यालय से आकर बोली- छुट्टी॥१॥

मामाजी लेने आते जब आती छुट्टी।
लालू की गाड़ी से सैर कराती छुट्टी॥२॥

स्टेशन पर विकट भीड़ बढ़वाती छुट्टी।
कुली-लाल, टीटी-काला दिखलाती छुट्टी॥३॥

धक्का-मुक्की ठेलम-ठेल मचाती छुट्टी।
खेल-तमाशा नाटक-नाच नचाती छुट्टी॥४॥

मम्मी संग नानी के घर मैं आयी छुट्टी।
डैडी ऑफ़िस करें मिल नहीं पायी छुट्टी॥५॥


दादा, ताऊ, काका से मिलवाती छुट्टी।
दूर देश से भइया को बुलवाती छुट्टी॥६॥


अम्मा, दादी, बूआ रोज मनाती छुट्टी।
देख शरारत इनको नहीं सुहाती छुट्टी॥७॥

घर में सुन्दर मंगलदीप सजाती छुट्टी।
बच्चों के मुख पर मुस्कान खिलाती छुट्टी॥८॥

दफ़्तर की माया से मोह छुड़ाती छुट्टी।
घर-आंगन से गाँव-गिराँव जुड़ाती छुट्टी॥९॥


रोज-रोज के ऑफ़िस के चक्कर से छुट्टी।
जोड़ घटाना गुणा भाग कर-कर से छुट्टी॥१०॥

बाबू, चपरासी, दफ़्तरी मनाते छुट्टी।
साहब कभी–कभी ही लेने पाते छुट्टी॥११॥


रौनक से भर उठे गाँव जब होती छुट्टी।
लौटे हैं घर शंकर, महंगू, मोती छुट्टी॥१२॥

चित्र tribuneindia.com से साभार
मेलों में कुश्ती दंगल लड़वाती छुट्टी।
गाँव-गाँव से झगड़े फिर करवाती छुट्टी॥१३॥

शहरी रहन-सहन से भेंट कराती छुट्टी।
महानगर का एड्स गाँव तक लाती छुट्टी॥१४॥

दुनिया भर का हाल यहाँ बतलाती छुट्टी।
फैशन का भी माल लाद कर लाती छुट्टी॥१५॥

सबने उछल-कूदकर खूब मनायी छुट्टी।
होना इसका अन्त लगे दुःखदायी छुट्टी॥१६॥

(सिद्धार्थ)

6 comments:

  1. छुट्टी बड़े काम की चीज है!

    ReplyDelete
  2. वाह और आह भी !
    पूजा पंडालों पर ड्यूटी के चलते
    हाय नहीं मिली मनभावन छुट्टी

    ReplyDelete
  3. काश मिल जाए कोई छुट्टी...

    ReplyDelete
  4. छुट्टी में मैं तो ऐसा भागा की ब्लॉग से नाता ही छूटने लगा. पर जो भी हो बड़ी मस्त होती है ये छुट्टी !

    ReplyDelete

आपकी टिप्पणी हमारे लिए लेखकीय ऊर्जा का स्रोत है। कृपया सार्थक संवाद कायम रखें... सादर!(सिद्धार्थ)