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Saturday, September 27, 2008

किताबों की खुसर-फुसर… एक और क्षेपक


(चित्र wordpress.com से साभार)



ब्लॉगर महोदय पुस्तकालय गये, जाने कैसे किताबों की बात-चीत सुन ली; और झेंप मिटाने के लिए कुछ पुराने पृष्ठों को पलटना शुरू किया। लेकिन यह पन्ने पलटना भी बड़ा काम का साबित हुआ। बल्कि यूँ कहें कि इन्हें खजाना हाथ लग गया।

वहाँ सरस्वती से मुलाकात हो गयी। फिर तो गलबहिंयाँ डाले देर तक चिपके रहे। मोबाइल से फोटू खींची। वहाँ के प्रबन्धक ने बार-बार घड़ी देखने के बाद अन्ततः संकोच छोड़ कर जब बाहर अन्धेरा हो जाने और घर के लिए देर होने की बात कह दी, तब बड़े बे-मन से वहाँ से चले थे।

घर आए तो ‘सत्यार्थमित्र’ के पाठकों से सरस्वती की चर्चा करने का तरीका सोचते रहे। अदने से मोबाइल में जो तस्वीर खींच लाए थे उसे ब्लॉग में पोस्ट करने का जुगाड़ खोजते रहे। तब एक बार फिर बीबी-बच्चे अपनी बारी की प्रतीक्षा में टाइम काटते रह गये।
काफी जद्दोजहद के बाद आखिरकार फोटो ठेलने में सफलता मिली, खुशी से नाच उठे। जल्दी से मजमून टाइप किया और देमारा

सुबह जब कम्प्यूटर पर सत्यार्थमित्र खुला तो अचानक चिल्ला उठे; “अरे सुनती हो जी! …ये देखो, …मेरी पचासवीं पोस्ट।”
“अरे, …इसमें इतना चिल्लाने की क्या बात है?”
“है न… मुझे तो कल ध्यान ही नहीं आया, जब इसे लिख रहा था।”
“अच्छा हुआ जो ध्यान नहीं आया” पत्नी ने उलाहना दे ही डाली; “…कल तो आपने बच्चों पर भी ध्यान नहीं दिया था।”
फिर पूछ बैठीं, “वैसे आप क्या करते जो ध्यान आ जाता।”
“वही जो अर्द्धशतक लगाने पर नये बल्लेबाज करते हैं।”
“क्या हेलमेट उतारकर (कम्प्यूटर छोड़कर) धरती पर लेट जाते?”
“…हेलमेट तो शतक पर उतारा जाता हैं, …लेकिन यहाँ बल्ले को चूमकर साथियों की ओर इशारा तो कर ही सकता था।”
“तो अब कसर पूरी कर लीजिए न…!”
“नहीं …अब तो स्कोर आगे बढ़ गया। …चलो, अब शतक के लिए कमर कसते हैं… सारा जश्न तभी मनाएंगे।”

इधर खुसर-फुसर की दूसरी किश्त तैयार करने में चिन्तित हो लिये हैं। पहली पोस्ट की लम्बाई फुरसतिया इश्टाइल की हो गयी तो बहुतों ने बीच में ही कट लेना उचित समझा। सोच रहे हैं कि उस लाइब्रेरी के भीतर जो करुणामय बातें सुन रखी हैं उन्हें पूरा का पूरा दुनिया को नहीं बताया तो शायद पाप लग जाएगा। इनकी ओर बड़ी उम्मीद भरी निगाहें उठ खड़ी हुई थीं। अब देखिए क्या करते हैं…।
(सत्यार्थमित्र की ओर से)

5 comments:

  1. ये पोस्ट क्या थी अगले पोस्ट की अग्रमी सूचना ? :) :)

    वीनस केसरी

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  2. दुनिया को नही बताया तो पाप लग जायेगा =इतने में ही सब कुछ कहदिया /महोदय एक निवेदन है के मैंने आज एक लेख लिखा है आप जैसे विद्वान् उसकी आलोचना करे ,उसके विपरीत अपनी मताभिव्यक्ति करे ,उसके विरोध में सतर्क कुछ टीका टिप्पणी करें ,कुछ मुझे कुछ पाठकों को मार्ग सुझाएँ तो उत्तम रहेगा

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  3. हाफसेंचुरी की बधाई। शानदार शतकीय पारी देखने के लिए पैवेलियन में हम भी ताली बजा रहे हैं

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  4. महोदय, आप तो अपने अन्दर कई हजार पोस्टों का माद्दा रखे हैं। अत: यह अर्धशतक तो उसका जरा सा ट्रेलर मात्र है। हिन्दी जगत को आपका बहुत बहुत कण्ट्रीब्यूशन चाहिये।

    अभी तो भोर का सूरज उगने का अहसास भर है।

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