हमारी कोशिश है एक ऐसी दुनिया में रचने बसने की जहाँ सत्य सबका साझा हो; और सभी इसकी अभिव्यक्ति में मित्रवत होकर सकारात्मक संसार की रचना करें।

Sunday, August 17, 2008

सब ढंक गया.!..


यमुना नदी का सरस्वती घाट,
जिसके हो चले हैं
अब अच्छे ठाट ।
वहाँ पक्की, मजबूत सीढ़ियाँ देखकर
सहसा ठिठक गया ।
नदी किनारे की वो बालू की जमीन,
उस जमीन पर बना
वह दो जोड़ी पैरों का निशान,
सब ढक गया?

वहाँ कभी थी गीली-दलदली जमीन,
जिसके पास ही उसने
सूखी और साफ जगह दिखायी थी।
थोड़ी देर शान्त और एकान्त बैठकर,
अपनी बात सुनाने को,
उसने अपने दुपट्टे की चादर बिछायी थी।

था एक कठिन दौर,
जब वह अपनी कमजोरी
या कहें, कायरता
मिटा न सका था।
घर–परिवार के सपने तोड़कर,
अपने मदमस्त सपने
सच साबित करने का हौसला
जुटा न सका था।

उनके बीच की डोर
तनती जा रही थी।
प्यार के सपनों की राह पर
दुनियादारी की दीवार
बनती जा रही थी।

दुनिया से हारकर दोनो नें
अपनी उस दुनिया को
समेट लिया था।
दूर हो जाएंगे, यह जानकर
एक दूसरे को मन ही मन
भेंट लिया था।

फिर भी
बैठे रहते थे,
ठहरी हुई सी यमुना के किनारे,
उस मुट्ठी भर समय को पकड़कर।
जैसे रोक ले कोई,
पानी से भींगी रेत को
मुट्ठी में जकड़कर।

इस आस में,
कि जब तक पानी है,
यह रेत मुट्ठी से नहीं निकलेगी।
मानो यहाँ की गहरी यमुना
चन्द कदम चलकर,
वेगवती गंगा में नहीं मिलेगी।

बुझती आस को
जिन्दा करने की उम्मीद में,
उन्होंने समय की उस रेत में
आँखों का पानी भी मिलाया था।
लेकिन होनी तो होनी ही थी,
अँधेरा घना हुआ, वे लौट गये,
यमुना का पानी गंगा में जा समाया था ।
(सिद्धार्थ)

10 comments:

  1. बहुत सुन्दर यादे,्बहुत कुछ कहती हे आप की कविता की पक्त्तियां .
    धन्यवाद

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  2. अति सुंदर...बहुत उम्दा.....
    अद्भुत लिखा आपने.
    बहुत खूब.
    पढ़ कर बहुत ही अच्छा लगा.

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  3. इस आस में,
    कि जब तक पानी है,
    यह रेत मुट्ठी से नहीं निकलेगी।
    मानो यहाँ की गहरी यमुना
    चन्द कदम चलकर,
    वेगवती गंगा में नहीं मिलेगी।

    बहुत कुछ गहरा सा कह गये यार

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  4. अँधेरा घना हुआ, वे लौट गये,
    यमुना का पानी गंगा में जा समाया था ।


    बहुत सुंदर ! अनन्त गहराई है !
    शुभकामनाएं !

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  5. स्कन्द शुक्लाWednesday, 20 August, 2008

    (ई-मेल पर प्राप्त टिप्पणी)
    Read your poem ' saraswati ghat'. I wanted to post the following comment on the blog but it wasn't getting on to it. The comment was--
    '' Beautiful sentiments. The poem is true to the definition of achieving universality through the particular ''.

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  6. अरे सर किस बक्से से निकालकर लाए हैं।

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  7. भावुक हृदयोद्गार, जो man se nikal seedhe man ko छू पाने में समर्थ है...

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  8. भावुक हृदयोद्गार, जो man se nikal seedhe man ko छू पाने में समर्थ है...

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